Raksha Bandhan 2026: जानिए रक्षाबंधन की तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्राकाल की पूरी जानकारी

Raksha Bandhan 2026: जानिए रक्षाबंधन की तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्राकाल की पूरी जानकारी

रक्षाबंधन 28 अगस्त को, अबकी बार रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्राकाल का साया : पं. रामकिशन महाराज

अबकी बार रक्षाबंधन शुक्रवार, सुकर्मा योग में होने से रहेगा विशेष फलदाई : पं. रामकिशन महाराज

विष्णु दत्त शास्त्री/तोशाम / 23 अगस्त 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो

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भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जोकि अबकी बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सभी बहनें राखी के रूप में अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई इसके बदले में बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षाबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए तोशाम के दक्षिणमुखी संकटमोचन मेहंदीपुर बालाजी दरबार के महंत पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास रहने वाला है। 28 अगस्त को राहुकाल का समय छोड़कर पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय रहेगा, क्योंकि अबकी बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल का साया नहीं रहेगा। उनका कहना यह कि पूर्णिमा पर आमतौर पर भद्रा रहती है और भद्राकाल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा, यानी बहनें राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट के बीच का समय छोड़कर सुबह से शाम तक कभी भी अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।  

रक्षाबंधन के दिन बन रहा है दुर्लभ संयोग...
पंडित रामकिशन महाराज के अनुसार अबकी बार श्रावणी पूर्णिमा पर 28 अगस्त को शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, बव उपरांत कौलव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। उनका कहना था कि धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार बहनें भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। शुक्रवार के दिन सुकर्मा योग होने से भी यह दिन विशेष शुभ फलदायी माना जा रहा है।

इस रक्षाबंधन पर नहीं है भद्रा का साया, सुबह कुछ समय रहेगा राहुकाल...
पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि अबकी बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है। उनका कहना था कि रक्षाबंधन पर अक्सर ऐसा होता है कि भद्रा का अशुभ साया भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार में खलल डाल देता है और त्योहार का मजा किरकिरा हो जाता है। खुशी की बात यह है कि इस बार भद्रा नहीं है और भाई-बहन पूरे आनंद और प्रेम सौहार्द के साथ इस त्योहार को मनाएंगे। लेकिन सुबह कुछ समय राहुकाल अवश्य रहेगा। पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में भद्राकाल और राहुकाल को अशुभ समय माना गया है। मान्यता है कि भद्रा और राहुकाल के दौरान कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए 28 अगस्त को दिनभर भद्रा का कोई अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा, लेकिन, 28 अगस्त को सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक राहुकाल रहेगा। यद्यपि पूर्णिमा तिथि सुबह 09 बजकर 48 मिनट पर ही समाप्त हो रही है, फिर भी यदि आप दिन में किसी समय राखी बांध रहे हैं तो इसे राहुकाल की अवधि में राखी बांधने से बचें।

एक दिन पहले खत्म हो जाएगा भद्राकाल...
पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जो रात 9 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। जिससे 28 अगस्त को राहुकाल का समय छोड़कर रक्षाबंधन का पूरा दिन शुभ रहेगा। 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि प्रातः 9 बजकर 48 मिनट तक है। रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं होगा।   पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से शुरू हो जाएगी जोकि 28 अगस्त को सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त...
पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 06 बजकर 08 मिनट से प्रातः 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, वहीं शुभ का चौघड़िया दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से दोपहर 02 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। अपराह्न दोपहर 01 बजकर 44 मिनट से सांय 04 बजकर 16 मिनट तक रहेगा तथा चर का चौघड़िया सांय 05 बजकर 13 मिनट से सांय 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। अभिजित दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक है। पंडित रामकिशन महाराज ने कहा कि अबकी बार शुभ योग में रक्षाबंधन रहेगा क्योंकि राखी के दिन पूर्णिमा तिथि और शुक्रवार दिन का उत्तम संयोग बन रहा है। जिससे इस दिन की महत्ता और बढ़ गयी है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को सुख, सौहार्द और प्रेम का दिन माना जाता है। पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा की पूर्णता का प्रतीक माना गया है। रक्षाबंधन पर यह संयोग पारिवारिक संबंधों में स्नेह, संवाद और आत्मीयता बढ़ाएगा। इस दिन सूर्य सिंह राशि में, गुरु कर्क राशि में, शनि मीन राशि, राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में विद्यमान रहेंगे। गुरु की स्थिति को ज्ञान, संस्कार व पारिवारिक मार्गदर्शन का प्रतीक है।

राखी बांधने का सही तरीका...
पंडित रामकिशन महाराज ने बताया कि राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। बहनों को पूजा की थाली में चावल, रौली, राखी, दीपक आदि रखना चाहिए। इसके बाद बहन को भाई के अनामिका अंगुली से तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाएं। अक्षत अखंड शुभता को दर्शाते हैं। उसके बाद भाई की आरती उतारनी चाहिए और उसके जीवन की मंगल कामना करनी चाहिए। कुछ जगहों पर भाई की सिक्के से नजर उतारने की भी परंपरा है।

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