तरावड़ी में महिलाओं ने साझा किए रक्षाबंधन पर विचार, मोबाइल की दुनिया से दूर रिश्तों को मजबूत करने का दिया संदेश

तरावड़ी में रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर महिलाओं ने अपने विशेष विचार साझा किए हैं। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि मोबाइल की दुनिया में खोते रिश्तों को फिर से जोड़ने का संदेश यह पर्व देता है। राखी बांधने से ज्यादा जरूरी रिश्तों को निभाना है और दिलों में रिश्ते मजबूत होने चाहिए। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का ऐसा पर्व है जिसका इंतजार हर भाई-बहन को पूरे साल रहता है।
हल्के के विधायक भगवानदास कबीरपंथी की धर्मपत्नी सविता कबीरपंथी, के.एस. ओवरसीज प्रा.लि. तरावड़ी की सी.एम.डी. ममता गोयल व जी.वी. राईस यूनिट की सी.एम.डी. सुमन बंसल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है। यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और अपनापन मजबूत करने का दिन है। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन रिश्तों की मिठास आज भी वही है।
श्री हंस राईस मिल्स की सी.एम.डी. रजनी गुप्ता, भाजपा नेत्री मीना चौहान एवं संयोगिता गुप्ता ने कहा कि रक्षाबंधन आते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। भाई-बहन का आपसी प्यार, राखी बांधने की खुशी और मिठाई खिलाने के पल मन को भावुक कर देते हैं। भाई और बहन दोनों एक-दूसरे की ताकत बनें और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ दें।
गर्ग राईस इंडस्ट्रीज की सी.एम.डी. संतोष गुप्ता, न्यू कैम ऑयल प्रा.लि. से मीनू तॉयल, एस.एस. राईस यूनिट से सुनैना हंस एवं श्री राम एग्रोटेक की सीएमडी सुनीता सिंगला ने कहा कि रक्षाबंधन हमें बेटियों और महिलाओं के सम्मान का संदेश भी देता है। समाज में ऐसा माहौल बने जहां हर बेटी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। राखी का धागा भले ही छोटा हो, लेकिन इसमें वर्षों पुरानी भावनाएं जुड़ी होती हैं।
भाजपा नेत्री सोनम कबीरपंथी, डबल चाबी बासमती राईस की डायरेक्टर प्रेक्षा गोयल एवं श्रीराम राईस यूनिट की डायरेक्टर पलक सिंगला ने कहा कि आज त्योहारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने की होड़ रहती है। मोबाइल से ज्यादा समय परिवार और भाई-बहन के साथ बिताना चाहिए, क्योंकि असली खुशी रिश्तों में है, तस्वीरों में नहीं।
डा. कशिश सलूजा, चारू बंसल एवं ज्योति बंसल ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर हमें पर्यावरण के अनुकूल राखियों को बढ़ावा देना चाहिए। स्थानीय कारीगरों और महिलाओं द्वारा तैयार राखियां खरीदकर हम स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे सकते हैं। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी संगीता गुप्ता, भावना मिड्डा, रेनू गुप्ता एवं सविता जांगड़ा ने कहा कि परिवार में बेटियों और बहनों को भी बराबरी के अधिकार और अवसर मिलने चाहिए।