तरावड़ी में रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने साझा किए विचार, कहा कलाई पर सजेगा प्यार और रिश्तों में घुलेगी मिठास

तरावड़ी में रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने साझा किए विचार, कहा कलाई पर सजेगा प्यार और रिश्तों में घुलेगी मिठास

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का एक ऐसा पर्व है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को पूरे साल रहता है। राखी के पवित्र धागे में केवल भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना ही नहीं जुड़ी होती है। इसके साथ ही बचपन की यादें, अपनापन और जीवनभर साथ निभाने का भाव भी इस पर्व में गहराई से जुड़ा होता है। बदलते दौर में रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीके जरूर बदल गए हैं, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की मिठास आज भी पूरी तरह बरकरार है। तरावड़ी में रक्षाबंधन को लेकर महिलाओं ने अपने विचार खुलकर साझा किए हैं और बताया है कि उनके लिए इस विशेष पर्व का क्या महत्व है।

रिश्तों की डोर सबसे मजबूत होने की बात डबल चाबी बासमती राईस की डायरेक्टर प्रेक्षा गोयल ने कही है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का एक साधारण पर्व नहीं है। यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और अपनापन को और अधिक मजबूत करने का एक खास दिन है। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बेशक बदले हैं, लेकिन रिश्तों की मिठास आज भी बिल्कुल वही है।

बचपन की यादें ताजा करता है रक्षाबंधन, ऐसा भाजपा नेत्री सोनम कबीरपंथी ने कहा है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन आते ही उनके बचपन की सभी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। भाई-बहन का आपसी प्यार, राखी बांधने की खुशी और एक-दूसरे को मिठाई खिलाने के वे पुराने पल आज भी मन को भावुक कर देते हैं। आज के समय में रक्षाबंधन का अर्थ केवल बहन की रक्षा का वचन लेना ही नहीं होना चाहिए। भाई और बहन दोनों को एक-दूसरे की बड़ी ताकत बनना चाहिए और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देना चाहिए।

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राखी में छिपा है भावनाओं का संसार, यह बात जी.वी. राईस यूनिट से जुड़ी चारू बंसल ने कही है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन का यह पर्व हमें बेटियों और महिलाओं के सम्मान का एक बहुत बड़ा संदेश भी देता है। समाज में एक ऐसा माहौल बनना चाहिए जहां हर बेटी खुद को पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके, तभी इस पवित्र पर्व की सार्थकता पूरी होगी। राखी का धागा देखने में भले ही छोटा और सामान्य होता है, लेकिन इसमें भाई-बहन की वर्षों पुरानी भावनाएं जुड़ी होती हैं। यह त्योहार हमें अपने रिश्तों को पर्याप्त समय देने और उन्हें हमेशा सहेजकर रखने की प्रेरणा देता है।

असली खुशी रिश्तों में है, तस्वीरों में नहीं, यह बात न्यू कैम ऑयल प्रा.लि. से जुड़ी मीनू तायल ने कही है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समय में त्योहारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने की एक बड़ी होड़ लगी रहती है। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर यह बहुत जरूरी है कि मोबाइल फोन पर समय बिताने से ज्यादा समय अपने परिवार और भाई-बहन के साथ बिताया जाए, क्योंकि असली खुशी हमेशा रिश्तों में होती है, न कि केवल तस्वीरों में।

बहनों को भी दें बराबरी का सम्मान, यह बात सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी डॉ. कशिश सलूजा ने कही है। उन्होंने कहा कि इस बार के रक्षाबंधन पर हमें ऐसी राखियों को बढ़ावा देना चाहिए जो पर्यावरण के पूरी तरह अनुकूल हों। स्थानीय कारीगरों और महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियां खरीदकर हम त्योहार मनाने के साथ-साथ स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा बहनों को भी समाज में हमेशा बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए।

बहनों के सम्मान और खुशियों का ध्यान रखें भाई, ऐसा अध्यापक सविता जांगड़ा ने कहा है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन का यह पर्व हमें यह सोचने का एक बड़ा अवसर देता है कि परिवार में बेटियों और बहनों को भी बराबरी के सभी अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। केवल राखी के दिन ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष बहनों के सम्मान और उनकी खुशियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रक्षाबंधन की असली खुशी कभी भी महंगे उपहारों पर निर्भर नहीं करती है। भाई-बहन का सच्चा प्यार और एक-दूसरे के प्रति आपसी सम्मान ही सबसे बड़ा उपहार होता है।

बहन की दुआ जीवनभर साथ रहने वाली पूंजी है, यह बात जी.वी. राईस यूनिट से जुड़ी ज्योति बंसल ने कही है। उन्होंने कहा कि एक बहन के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधना सिर्फ एक रस्म नहीं होती है, बल्कि यह उसकी खुशहाली और सफलता की सच्ची कामना भी होती है। बहन की दुआ और भाई का प्यार जीवनभर साथ रहने वाली एक बहुत बड़ी पूंजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहनों का सम्मान होना समाज में सबसे पहली जरूरत है।

बचपन से बुढ़ापे तक कायम रहता रिश्ता, यह बात सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी भावना मिड्डा ने कही है। उन्होंने बताया कि राखी बांधते समय भाई हमेशा अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, लेकिन आज के दौर में रक्षा का अर्थ केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। बहन की शिक्षा, उसका सम्मान, उसकी आत्मनिर्भरता और उसके जीवन के सपनों में उसका साथ देना भी उतना ही ज्यादा जरूरी है। उन्होंने अंत में कहा कि भाई और बहन का यह पवित्र रिश्ता बचपन से लेकर बुढ़ापे तक पूरी तरह कायम रहता है।

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