Real Story” भारत सरकार कर रही है कोरोना के नाम दिखावा

आपबीती–” Real Story”

भारत सरकार कर रही है कोरोना के नाम दिखावा

-एयरपोर्ट अथॉरिटी ने हजारों लोगों की जान को डाला जोखिम में

– अधिकारियों ने सरकार के आदेश का हवाला देकर हजारों यात्रियों को 15 घन्टे रखा बंधक

-15 घण्टे बाद कोरोना के ईलाज पर फॉर्मेलिटी कर बिना इलाज किया यात्रियों को रिलीज

—————

सुरेन्द्र कुमार जींद।

जिस प्रकार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देश की जनता ने जनता कर्फ्यू लगाकर यह बता दिया कि वे कोरोना से निपटने के लिए सरकार के साथ है। जिस प्रकार आम जनता ने सरकार का साथ दिया क्या सरकार भी जनता के लिए गंभीर है ? दिल्ली के इंदिरागांधी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर जिस प्रकार हजारों यात्रियों को उनके पासपोर्ट लेकर 15 घण्टे बंधक बनाया गया और कोरोना की जांच के नाम पर परेशान किया गया उसे देखकर तो कतई नही लगता।

भारत सरकार कोरोना के इलाज के लिए गंभीर नहीं है बल्कि इलाज के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। विदेश से एयरपोर्ट पर आने वाले हजारों यात्रियों को किस प्रकार कोरोना के इलाज के नाम पर बंधक बनाया गया और उनकी जान जोखिम में डाली गई, वह बहुत ही डरावना और भयावह है। इलाज के नाम पर केवल फॉरमैलिटी कर यात्रियों को मामूली पूछताछ कर रिलीज किया गया। यहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि अगर कॅरोना जैसी भयंकर बीमारी की जांच के लिए यात्रियों से केवल चंद सवाल पूछे जाने थे तो एक साथ इतने लोगो को इक्कठा रखना कहाँ की समझदारी थी। क्यों सैंकड़ो नोजवानो के साथ सैंकड़ो महिलाओं , बच्चों, बुजुर्गों की जान जोखिम में डाली गई।अगर इस बंधक बनाई गई भीड़ में कोई भी कॅरोना बीमारी से ग्रस्त हुआ तो पता नही इसके क्या परिणाम होंगे।

एयरपोर्ट के इस मंजर का मैं स्वयं भुक्तभोगी रहा हूं। 20 मार्च को मैं मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया से भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब साढ़े 11 बजे श्रीलंकन एयरलाइन नम्बर यूएल 605 में सवार हुआ था। रात को करीब 11 बजे कोलंबो में उतरे और साढ़े 12 बजे फ्लाइट यूएल 191में बैठकर करीब सुबह साढ़े 4 बजे दिल्ली के इंदिरागांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। हवाई जहाज से उतरने के बाद सभी यात्रियों का मशीन से टेम्प्रेचर जांचा गया। इमीग्रेशन के लिए जैसे हम आगे बढ़े हमें जांच के नाम पर रोका लिया गया। बताया गया कि सरकार और अधिकारियों का आदेश है कि आगे न जाने दिया जाए। इसी दौरान अन्य देशों से कुछ और फ्लाइट आ गई और उनके यात्री भी वहीं रोक लिए गए। सैंकड़ो लोग एक ही जगह पर रोकने से अव्यवस्था फैल गई। भीड़ में मौजूद बच्चे , महिलायें, बुजुर्ग बिलखने लगे। यात्रियों के लिए ना ही खाने की और पीने के पानी तक कि व्यवस्था नही की गई। यात्रियों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया। हंगामे के बाद यात्रियों को ग्रुप में इमिग्रेशन के लिए छोड़ा जाने लगा। यही हालत अब इमिग्रेशन कांउटर पर हो चुकी थी। अधिकारियों के पास कोई जवाब नही था। वो बोल रहे थे कि सब यात्रियों की कॅरोना बीमारी की जांच होगी उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यहां भी हंगामे के बाद इमिग्रेशन शुरू किया गया। यात्रियों की जांच के नाम पर 30-30 के ग्रुप बना दिये गए और उन्हें आगे भेजना शुरू किया गया। मैं 57 नम्बर ग्रुप में था। यात्रियों के पास इलाज करने के अलावा कोई चारा नही था। करीब 15 घण्टे के लंबे इंतजार के बाद सभी यात्रियों को लाइन में एयरपोर्ट के बाहर कोरोना के लिए बनाए गए वार्ड में ले जाया गया। वहां चिकित्सों की के टीमें यात्रियों को जांच रही थी। मुझे भी जब चिकित्सक के पास भेजा तो उन्होंने मुझसे पूछा कि आपको बुखार, जुखाम, खांसी या कोई और दिक्कत तो नही है। आपको कोई लंबी चलने वाली बीमारी तो नही है। मेरे मना करने के बाद मेरे दांये हाथ पर एक मोहर लगा कर मुझे घर चले जाने को कहा। चिकित्सको ने मुझे 14 दिन घर आइसोलेशन पर रहने को कहा। मुझे देखकर हैरानी हुई कि 15 घण्टे बंधक बनाने के बाद अधिकतर यात्रियों को ऐसी ही पूछताछ और हिदायत देकर रिलीज किया जा रहा था। जांच के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा था। लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही थी। इन हजारों लोगों में अलग अलग देशों से आए किसी एक को भी अगर कोरोना होगा तो अंदाज लगाना मुश्किल है कि अधिकारियों और सरकार की लापरवाही से कितने लोगों की जान मुश्किल में पड़ने वाली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *