रेवाड़ी के गढ़ी बोलनी रोड पर सफेद पट्टी न होने से हादसे का बड़ा खतरा, राष्ट्रीय नवचेतना मंच ने दी चेतावनी

रेवाड़ी के गढ़ी बोलनी रोड पर सफेद पट्टी न होने से हादसे का बड़ा खतरा, राष्ट्रीय नवचेतना मंच ने दी चेतावनी

रेवाड़ी के सबसे वीआईपी रोड गढ़ी बोलनी रोड पर सफेद पट्टी न होने के कारण हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। यह जानकारी राष्ट्रीय नवचेतना मंच के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र बैरियावास ने दी है। रेवाड़ी में 30 अगस्त को यह मामला सामने आया है।रेवाड़ी का सबसे वीवीआईपी गढ़ी बोलनी रोड कुछ माह पूर्व ही नया बनाया गया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आज तक इस सड़क पर सफेद पट्टी नहीं लगाई गई है।

राष्ट्रीय नवचेतना मंच के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र बैरियावास ने इस संबंध में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि यह रेवाड़ी का सबसे महत्वपूर्ण रोड माना जाता है। इस रोड पर कई बड़ी शिक्षण संस्थाएं और अनेकों हाउसिंग सोसायटियां स्थित हैं। इन सोसायटियों और संस्थाओं में हजारों परिवार रहते हैं। इसके अलावा रोज हजारों छात्र-छात्राओं का इस मार्ग पर आना-जाना लगा रहता है।

जयपुर हाईवे और रेवाड़ी बायपास को जोड़ता है यह मार्ग

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यह महत्वपूर्ण रोड जयपुर हाईवे यानी नेशनल हाईवे-48 को रेवाड़ी बायपास यानी नेशनल हाईवे-11 से सबसे नजदीक जोड़ता है। इसी वजह से इस रोड पर हमेशा भारी ट्रैफिक रहता है। इतना वीआईपी रोड होने के बावजूद इस पर सफेद पट्टी का न होना विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही को साफ दिखाता है।

तेज गति और रात के समय दुर्घटना का खतरा

रोड नया होने के कारण इस पर वाहन बहुत तेज गति से चलते हैं। रात के समय सड़क पर सफेद पट्टी न दिखने के कारण दुर्घटना का अंदेशा लगातार बना रहता है। इस रोड पर सफेद पट्टी न होने के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।

प्रशासन से की गई ये प्रमुख मांगें

राष्ट्रीय नवचेतना मंच ने प्रशासन के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं। हमारी मांग है कि गढ़ी बोलनी रोड पर तुरंत सफेद पट्टी लगाई जाए। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों और सोसायटियों के सामने स्पीड ब्रेकर व जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाए। रात के समय दृश्यता ठीक करने के लिए रिफ्लेक्टर व चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाने की मांग की गई है।

सात दिन का अल्टीमेटम और प्रदर्शन की चेतावनी

संगठन ने प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। यदि 7 दिन के अंदर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई तो राष्ट्रीय नवचेतना मंच कड़ा कदम उठाएगा। मंच के पदाधिकारी स्थानीय निवासियों और छात्रों के साथ सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

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