रेवाड़ी के ऐतिहासिक घंटेश्वर मंदिर प्रबंधन की निष्पक्ष जांच की मांग, डीसी को सौंपा ज्ञापन

अटल हिन्द/मनोज गोयल रेवाड़ी, 26 अगस्त। रेवाड़ी शहर के प्राचीन एवं श्रद्धेय घंटेश्वर मंदिर के प्रबंधन और प्रशासन को लेकर श्रद्धालुओं एवं स्थानीय निवासियों ने बड़ा कदम उठाया है। सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में मंदिर के प्रबंधन, ट्रस्ट के गठन तथा मंदिर से जुड़े विभिन्न दावों की प्रामाणिकता की जांच करने को कहा गया है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। घंटेश्वर मंदिर लंबे समय से सभी वर्गों के श्रद्धालुओं के लिए एक सार्वजनिक धार्मिक स्थल रहा है। यहां वर्षों से पूजा-अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन, हवन सहित विभिन्न धार्मिक परंपराएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रही हैं। समय के साथ-साथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही मंदिर के चढ़ावे और दान में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
ट्रस्ट के गठन और दावों पर सवाल
ज्ञापन में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि पूर्व में मंदिर का प्रबंधन स्थानीय समुदाय के सम्मानित सदस्यों द्वारा देखा जाता था। लेकिन हाल ही में सीमित संख्या में कुछ लोगों द्वारा एक नया ट्रस्ट गठित किया गया है। इस नए ट्रस्ट के गठन के कारण अनेक श्रद्धालुओं एवं स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं ने इस बात की भी स्वतंत्र रूप से जांच करने की मांग की है कि क्या वाकई यह ट्रस्ट मंदिर की स्थापना कुछ व्यक्तियों के पूर्वजों द्वारा किए जाने का दावा करता है। वर्तमान ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर की पारंपरिक पूजा-पद्धति में कुछ बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के कारण धार्मिक परंपराओं के पालन में आम श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धार्मिक गतिविधियों में कठिनाइयां और प्रशासन से मांग
ज्ञापन में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि शिवलिंग और प्रतिमा के आसपास बैरिकेड लगा दिए गए हैं। इन बैरिकेड्स के कारण दीपक जलाने, पारंपरिक पूजा करने और घटस्थापना जैसी धार्मिक गतिविधियों में कठिनाइयां आ रही हैं। ज्ञापन में जिला प्रशासन से वर्तमान ट्रस्ट के गठन और उसके पंजीकरण की स्वतंत्र जांच करने की मांग की गई है। इसके साथ ही ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेजों एवं दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने को कहा गया है। प्रशासन से यह भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि मंदिर के प्रबंधन में कानून और श्रद्धालुओं के हितों का पूरा पालन हो। मंदिर की पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों को बिना किसी अनावश्यक हस्तक्षेप के लगातार जारी रखने की मांग भी उठाई गई है।
सार्वजनिक रिकॉर्ड और जांच की मांग
ज्ञापन में यह साफ कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा अवैधानिकता सामने आती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। मंदिर के प्रबंधन में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय निवासियों और नियमित श्रद्धालुओं की समुचित भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक प्रतिनिधि निकाय का गठन करने का सुझाव भी दिया गया है। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि ऐसा कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं है जो यह साबित करे कि यह मंदिर किसी एक परिवार की निजी पैतृक संपत्ति है। इस संबंध में राजस्व रिकॉर्ड, ऐतिहासिक दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों के रिकॉर्ड से पूरी तरह सत्यापन कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख नागरिक
यह ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख गणमान्य नागरिकों में बजरंग लाल सिंघल (सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर), राधेश्याम मित्तल (प्रधान व्यापार मंडल नई अनाज मंडी रेवाड़ी), मुकेश कुमार अग्रवाल भट्टा वाले, प्रेम शंकर गोयल कोसली वाले, दिनेश खंडेलवाल (व्यापारी मंडी), सतीश कुमार शर्मा (समाजसेवी), ओमप्रकाश गुप्ता, मुकेश अग्रवाल, घनश्याम डाटा, सुभाष जैन, उमेश कुमार, ललित कुमार, संजय डाटा, राम अवतार गुप्ता (ठेकेदार), प्रेम कौशिक (पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष ब्राह्मण सभा), डॉ. के.के. तनेजा, पवन गुप्ता, अरुण भार्गव, अमीर चंद अरोड़ा, पंकज गौगिया, प्रिंस गेरा, गौरव चावला, अरुण बेनी, शेर सिंह सैनी, नरेश अरोड़ा, सतीश यादव, अश्विनी यादव, अशोक कुमार शर्मा, जगभूषण गुप्ता (सेवानिवृत्त एडीजे एवं चेयरमैन पीएलए), प्रेमप्रकाश अग्रवाल भालखी वाले (कोषाध्यक्ष अग्रवाल सभा जिला रेवाड़ी), अजय कुमार अग्रवाल (कोषाध्यक्ष पब्लिक एजुकेशन बोर्ड), चंद्रशेखर गौतम (प्रधान ब्राह्मण सभा जिला रेवाड़ी), नरेंद्र लखेरा (एडवोकेट), सुनील खंडेलवाल (महामंत्री खंडेलवाल सभा), महेंद्र गोयल कोसली वाले (पूर्व उपाध्यक्ष आरडीएस कॉलेज), संजीव गौतम (एडवोकेट), संजय जैन (समाजसेवी), सतीश सैनी (समाजसेवी), भूपेंद्र भारद्वाज (पूर्व अध्यक्ष ब्राह्मण युवा संगठन), राजेश लखेरा (एडवोकेट), दिनेश वशिष्ठ (सेवानिवृत्त हेड मास्टर) तथा जयकुमार कौशिक सहित अनेक लोग शामिल रहे।