अमेरिका में भारतीय मूल के ऋषि कपूर को 11 साल की जेल

Atal Hind Team Online1 September 20269 min read28 viewsअमेरिका
अमेरिका में भारतीय मूल के ऋषि कपूर को 11 साल की जेल

अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित मियामी में भारतीय मूल के मशहूर रियल स्टेट डेवलपर ऋषि कपूर को अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने 11 साल और 4 महीने की जेल की सजा सुनाई है

फ्लोरिडा/न्यूयॉर्क /01 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज सोर्स

अमेरिका में भारतीय मूल के ऋषि कपूर को 11 साल की जेल, 89 मिलियन डॉलर के फ्रॉड का मामला

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अमेरिका के मियामी में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े भारतीय मूल के कारोबारी ऋषि कपूर को संघीय अदालत ने 11 साल 4 महीने जेल की सजा सुनाई है। कपूर पर करीब 89 मिलियन डॉलर यानी लगभग 750 करोड़ रुपये से ज्यादा की निवेशक धोखाधड़ी से जुड़े आरोप थे। उन्होंने अपने खिलाफ लगे मामले में दोष स्वीकार किया था।

ऋषि कपूर अमेरिका की कंपनी Location Ventures के पूर्व CEO रहे हैं। वे URBIN से भी जुड़े रहे। दक्षिण फ्लोरिडा में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के जरिए उन्होंने निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि कई प्रोजेक्ट्स के लिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल उन कामों में किया गया, जिनके लिए वह पैसा लिया ही नहीं गया था।

अदालत में कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए निवेशकों, पूर्व कर्मचारियों और परिवार से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह अपने अपराधों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं और इसके लिए कोई बहाना नहीं बना रहे हैं। यह मामला अब अमेरिका में बड़े रियल एस्टेट फ्रॉड के मामलों में चर्चा में है।

89 मिलियन डॉलर कैसे जुटाए गए?

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार ऋषि कपूर ने दक्षिण फ्लोरिडा में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के नाम पर 50 से ज्यादा निवेशकों से कम से कम 89 मिलियन डॉलर जुटाए थे। यह पैसा अलग-अलग प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स के लिए लगाया जाना था।

लेकिन जांच में आरोप लगा कि निवेशकों से किसी खास प्रोजेक्ट के लिए लिया गया पैसा दूसरे कामों में लगाया गया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक कुछ रकम दूसरे प्रोजेक्ट्स में चली गई, जबकि कुछ पैसे निजी खर्चों में भी इस्तेमाल किए गए।

मामले में Coconut Grove, Miami Beach, Coral Gables और Fort Lauderdale जैसे इलाकों में प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स का जिक्र हुआ। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए। इससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

अभियोजकों ने अदालत में यह भी कहा कि निवेशकों को कपूर ने अपनी ओर से कारोबार में लगाए गए पैसों के बारे में भी गलत जानकारी दी थी। अभियोजन पक्ष का दावा था कि उन्होंने अपने निवेश की रकम करीब 13 मिलियन डॉलर बताई थी, जबकि वास्तविक राशि इससे लगभग आधी थी।

हालांकि बचाव पक्ष ने अभियोजन की ओर से मामले को 89 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी बताने पर आपत्ति जताई। उनके वकील ने अदालत में कहा कि कपूर ने खुद उस अवधि में करीब 6 मिलियन डॉलर कमाए थे और यह मामला पारंपरिक पोंजी स्कीम जैसा नहीं था।

कर्मचारियों के टैक्स का पैसा भी जमा नहीं कराया

ऋषि कपूर पर केवल निवेशकों के पैसे के गलत इस्तेमाल का आरोप नहीं था। मामले में कर्मचारियों की तनख्वाह से काटे गए पेरोल टैक्स को सरकार के पास जमा नहीं कराने का आरोप भी शामिल था।

अमेरिकी कानून के तहत कर्मचारियों की तनख्वाह से Social Security और Medicare जैसे कार्यक्रमों के लिए कुछ टैक्स काटे जाते हैं। नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि वह यह पैसा निर्धारित समय पर Internal Revenue Service यानी IRS के पास जमा कराए।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक कपूर ने 2020 से 2022 के बीच कर्मचारियों की तनख्वाह से काटे गए पेरोल टैक्स का पैसा सरकार को नहीं दिया। मामले में करीब 2 मिलियन डॉलर के पेरोल टैक्स को रोककर रखने का आरोप लगाया गया था।

इसके अलावा उन पर 2019 से 2023 के बीच व्यक्तिगत संघीय आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। हालांकि अंततः उन्होंने जिन आरोपों में दोष स्वीकार किया, उनमें पेरोल टैक्स से जुड़ी साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला शामिल था।

ऋषि कपूर, पूर्व सीईओ लोकेशन वेंचर्स. Source: Location Ventures

महंगी यॉट खरीदने का भी मामला

इस केस में एक महंगी यॉट का मामला भी सामने आया। अभियोजन पक्ष के अनुसार कपूर ने अपने व्यक्तिगत बैंक खाते से 820,559 डॉलर एक 5 मिलियन डॉलर की 68 फुट लंबी Princess yacht की खरीद के लिए डाउन पेमेंट के रूप में ट्रांसफर किए थे।

सरकारी पक्ष ने इस लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जोड़ा। कपूर ने इसी से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग आरोप में भी दोष स्वीकार किया था।

यानी मामला सिर्फ प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने और न लगाने तक सीमित नहीं रहा। जांच में निवेशकों से जुटाए गए धन, निजी खर्च, बैंकिंग लेनदेन और टैक्स भुगतान से जुड़े कई पहलुओं को जोड़ा गया।

68 फीट लंबी आलीशान लग्जरी याच. Source: Denison Yacht Sales

निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?

अभियोजन पक्ष के अनुसार ऋषि कपूर पर निवेशकों के करीब 70 मिलियन डॉलर की रकम के लिए जिम्मेदारी बनती है। इसके अलावा Internal Revenue Service यानी IRS को भी करीब 800,000 डॉलर की रकम बकाया बताई गई।

यह रकम इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि यहां सिर्फ किसी एक निवेशक के साथ धोखाधड़ी की बात नहीं थी। जांच के मुताबिक 50 से ज्यादा निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई गई थी।

निवेशकों को उम्मीद थी कि उनकी रकम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगेगी और प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद उन्हें आर्थिक फायदा मिलेगा। लेकिन अभियोजन पक्ष के मुताबिक धन का इस्तेमाल कई दूसरे कामों में किया गया।

यही वजह है कि अमेरिकी अदालत ने मामले को गंभीर वित्तीय अपराध के रूप में देखा और कपूर को लंबी जेल की सजा दी।

प्री-कंस्ट्रक्शन डिपॉजिट को लेकर भी आरोप

जांच में प्री-कंस्ट्रक्शन कंडोमिनियम प्रोजेक्ट्स से जुड़े जमा पैसों का मामला भी सामने आया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि कुछ ग्राहकों द्वारा प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई रकम को एस्क्रो से निकलवाया गया और फिर उसे ऐसे खर्चों में लगाया गया, जिनका उस प्रोजेक्ट से सीधा संबंध नहीं था।

अमेरिकी रियल एस्टेट कारोबार में एस्क्रो व्यवस्था का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि खरीदार या निवेशक का पैसा तय शर्तों के अनुसार सुरक्षित रहे। अगर उस पैसे का इस्तेमाल किसी दूसरे उद्देश्य में होता है तो निवेशकों के हितों पर सीधा असर पड़ सकता है।

इसी तरह की गतिविधियों को लेकर अभियोजन पक्ष ने कपूर के खिलाफ अपना मामला मजबूत किया था।

कभी मियामी के बड़े कारोबारी चेहरे थे ऋषि कपूर

ऋषि कपूर ने दक्षिण फ्लोरिडा के रियल एस्टेट बाजार में अपनी पहचान बनाई थी। उनकी कंपनियों के जरिए कई प्रोजेक्ट्स की योजनाएं सामने आईं और वे स्थानीय कारोबारी तथा राजनीतिक हलकों में भी सक्रिय रहे।

उनके संपर्क मियामी और Coral Gables के मेयरों सहित स्थानीय राजनीतिक लोगों से भी बताए जाते रहे हैं। इसी वजह से उनका मामला सिर्फ एक कारोबारी विवाद नहीं रहा, बल्कि दक्षिण फ्लोरिडा के रियल एस्टेट और राजनीतिक सर्किल में भी चर्चा का विषय बन गया।

लेकिन कारोबार में बनाई गई यह पहचान उस समय संकट में बदल गई जब संघीय जांच एजेंसियों ने उनके वित्तीय लेनदेन और निवेशकों से जुटाई गई रकम की जांच शुरू की।

मार्च 2026 में कपूर को 37 आरोपों वाली संघीय अभियोग प्रक्रिया का सामना करना पड़ा था। बाद में मई में उन्होंने दो आरोपों में दोष स्वीकार कर लिया।

अदालत ने 11 साल 4 महीने की सजा क्यों दी?

अदालत ने कपूर को कुल 11 साल 4 महीने यानी 136 महीने की संघीय जेल की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने भी 136 महीने की सजा की सिफारिश की थी।

बचाव पक्ष इससे कम सजा चाहता था। उनके वकीलों ने करीब 121 महीने की सजा की मांग की थी, जिसे वे लागू सजा दिशानिर्देशों की निचली सीमा के करीब मान रहे थे।

अंत में अदालत ने 136 महीने की सजा सुनाई। यह लगभग 11 साल 4 महीने होती है।

इस फैसले के बाद कपूर को लंबे समय तक संघीय जेल में रहना होगा। निवेशकों को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए restitution यानी क्षतिपूर्ति का मुद्दा भी मामले का हिस्सा है।

कपूर ने अदालत में क्या कहा?

सजा सुनाए जाने से पहले ऋषि कपूर ने अदालत को एक पत्र भी दिया था। उन्होंने अपने किए गए कामों की जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि उन्हें अपने अपराधों पर पछतावा है।

उन्होंने निवेशकों, पूर्व कर्मचारियों और अपने परिवार से माफी मांगी। उनका कहना था कि वह अपने किए गए अपराधों की जिम्मेदारी बिना किसी बहाने के स्वीकार करते हैं।

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने मामले में दोष स्वीकार कर लिया था। हालांकि उनके बचाव पक्ष ने अदालत में यह जरूर कहा कि अभियोजन पक्ष ने उनके कारोबार और कथित धोखाधड़ी के आकार को जिस तरह पेश किया, वह पूरी तरह सही नहीं था।

पहले भी जांच के घेरे में आ चुके थे

ऋषि कपूर का नाम इससे पहले भी एक अलग Securities and Exchange Commission यानी SEC की नागरिक कार्रवाई में सामने आया था। 2024 में SEC से जुड़े एक अलग मामले में उन पर एक अन्य कथित धोखाधड़ी योजना को लेकर कार्रवाई हुई थी।

इस मामले में उन्होंने बिना किसी गलत काम को स्वीकार किए restitution देने पर सहमति जताई थी। यानी वह मामला मौजूदा आपराधिक मामले से अलग था।

इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग कानूनी मामलों को एक ही मामले के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

भारतीय मूल के कारोबारियों के लिए भी बड़ा संदेश

ऋषि कपूर का मामला इसलिए भी भारत में चर्चा में आया है क्योंकि वह भारतीय मूल के कारोबारी हैं और अमेरिका के रियल एस्टेट बाजार में बड़ी पहचान बना चुके थे।

अमेरिका में कारोबार करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह मामला बताता है कि निवेशकों के पैसे, टैक्स और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े नियमों का पालन कितना जरूरी है।

रियल एस्टेट में बड़ी रकम आने-जाने के कारण कंपनियों को निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए करना होता है जिसके लिए रकम जुटाई गई है। अगर पैसा दूसरे प्रोजेक्ट या निजी खर्च में लगाया जाता है तो मामला गंभीर कानूनी विवाद में बदल सकता है।

इस मामले की सबसे बड़ी सीख क्या है?

ऋषि कपूर की कहानी सिर्फ एक भारतीय मूल के कारोबारी को मिली जेल की सजा की खबर नहीं है। यह उन जोखिमों की भी याद दिलाती है जो बड़े रियल एस्टेट कारोबार में निवेशकों के पैसे के गलत इस्तेमाल से पैदा होते हैं।

एक तरफ कपूर ने मियामी के रियल एस्टेट बाजार में बड़ी पहचान बनाई और करोड़ों डॉलर की रकम जुटाई। दूसरी तरफ वही कारोबार बाद में संघीय जांच और अदालत तक पहुंच गया।

अदालत के फैसले के मुताबिक उन्हें 11 साल 4 महीने जेल में रहना होगा। मामला करीब 89 मिलियन डॉलर की निवेशक धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और पेरोल टैक्स से जुड़ा था।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 89 मिलियन डॉलर का आंकड़ा अभियोजन पक्ष द्वारा बताए गए कथित फ्रॉड का आकार है, जबकि बचाव पक्ष ने इस characterization पर आपत्ति जताई थी। इसलिए खबर लिखते समय इसे निर्विवाद तथ्य के बजाय अभियोजन पक्ष के आरोप और अदालत में सामने आए मामले के संदर्भ में रखना ज्यादा सही है।

फिलहाल ऋषि कपूर को मिली 11 साल 4 महीने की सजा इस मामले का सबसे बड़ा कानूनी परिणाम है। आगे निवेशकों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति और अन्य वित्तीय प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

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