मनरेगा फर्जीवाड़े में हाई कोर्ट ने रोहतक उपायुक्त से मांगा निजी हलफनामा

पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने मनरेगा योजना के फंड के गलत इस्तेमाल को मानने वाली लोकपाल की रिपोर्ट और तथ्यों की पुष्टि करने वाली शुरुआती रिपोर्ट के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करने तथा कोई कार्रवाई नहीं करने का संज्ञान लिया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने रोहतक के जिला उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वह मामले की स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना निजी हलफनामा दाखिल करें। यह सुनवाई चंडीगढ़ में हुई है जहाँ याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील जी.एस. गोपेरा पेश हुए, जबकि हरियाणा की ओर से एडिशनल एडवोकेट-जनरल दीपक बालियान बेंच के सामने पेश हुए।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर दिए निर्देश
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस राजेश गौर की डिवीजन बेंच ने हरियाणा राज्य और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ राम चंद्र और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया है। शुरुआत में ही, बेंच ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि लोकपाल की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद से काफी समय बीत चुका है। साल 2023 में दाखिल लोकपाल की रिपोर्ट में यह साफ माना गया था कि मनरेगा योजना के तहत फंड का गलत इस्तेमाल हुआ है।
शुरुआती रिपोर्ट की पुष्टि के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई
शुरुआती रिपोर्ट ने भी इन सभी तथ्यों की पूरी पुष्टि की है, फिर भी इस मामले में न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई है और न ही कोई कार्रवाई की गई है। इसके बाद कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा है कि वह उपायुक्त द्वारा व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामे के माध्यम से अपना पक्ष रखें। इस पूरे मामले को देखते हुए रोहतक के उपायुक्त मामले की खुद जांच करें और इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना निजी हलफनामा अदालत में दाखिल करें।
दो सप्ताह की समय-सीमा और अगली सुनवाई की तारीख
इस कार्य के लिए बेंच ने आदेश जारी होने के बाद से दो सप्ताह की सख्त समय-सीमा तय की है। अब इस महत्वपूर्ण मामले में अदालत में अगली सुनवाई 22 सितंबर को की जाएगी। चंडीगढ़ से यह जानकारी सामने आई है जहाँ इस मामले की कानूनी प्रक्रिया लगातार जारी है।