आरटीआई का जवाब दिए बिना प्रथम अपील में बुलाना गलत : नरेश गुणपाल

हिसार, 11 सितंबर। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई सूचना के संबंध में दायर प्रथम अपील पर अब सुनवाई निर्धारित की गई है। निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, हरियाणा, पंचकूला कार्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार अपीलकर्ता नरेश गुणपाल को 14 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में बताया गया है कि यह मामला आरटीआई अपील संख्या 005672/2026-नरेश गुणपाल से संबंधित है। नरेश गुणपाल द्वारा 8 अगस्त 2026 को प्रथम अपील दायर की गई थी। जारी आदेश के अनुसार सुनवाई प्रथम अपीलीय प्राधिकारी-सह-संयुक्त निदेशक, प्रशासन, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के कार्यालय कक्ष में होगी। संबंधित पीआरटी गेस्ट ब्रांच को भी मामले से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड एवं सूचना के साथ सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सुनवाई का उद्देश्य आरटीआई एक्ट, 2005 के तहत मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में मामले की सुनवाई करना है। अब 14 सितंबर को होने वाली सुनवाई में विभागीय रिकॉर्ड और अपीलकर्ता का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश गुणपाल के बयान
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश गुणपाल ने कहा कि जन सूचना अधिकारी की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि आरटीआई आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के अंदर आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध करवाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित 30 दिनों में जन सूचना अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जाता है, तो आरटीआई अधिनियम की धारा 7(2) के तहत इसे सूचना देने से इनकार माना जाता है। ऐसी स्थिति में आवेदक प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर कर सकता है.
नरेश गुणपाल ने कहा कि प्रथम अपील का उद्देश्य यह जांचना है कि जन सूचना अधिकारी ने सूचना समय पर क्यों नहीं दी और सूचना उपलब्ध कराने में क्या बाधा रही। ऐसे में मूल आरटीआई आवेदन पर कोई जवाब दिए बिना केवल प्रथम अपील की सुनवाई में आवेदक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाना आरटीआई एक्ट की पारदर्शिता एवं जवाबदेही की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रथम अपील की सुनवाई निर्धारित की गई है तो उसे व्हाट्सऐप कॉल अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी किया जा सकता है। इससे आवेदक को अनावश्यक रूप से कार्यालय पहुंचने की परेशानी नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि आरटीआई की धारा 7(6) के अनुसार यदि जन सूचना अधिकारी निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराने में विफल रहता है, तो मांगी गई सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसलिए विलंब के बाद सूचना देने के नाम पर आवेदक से सूचना/प्रतिलिपि शुल्क वसूलना भी कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा।
नरेश गुणपाल ने मांग की कि संबंधित विभाग पहले मूल आरटीआई आवेदन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए सूचना उपलब्ध करवाए तथा प्रथम अपील की सुनवाई में उन्हें ऑनलाइन माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
जरिकर्ता नरेश गुणपाल, आरटीआई एक्टिविस्ट 9416754925