खतौली में सद्भावना समारोह आयोजित, वक्ताओं ने कौमी एकता और आपसी भाईचारे का दिया कड़ा संदेश

खतौली में 17 अगस्त को बुढ़ाना रोड स्थित रॉयल गार्डन में कौमी एकता कमेटी के तत्वावधान में एक भव्य सद्भावना समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शेरे पंजाब हजरत उस्मान रहमानी शाही इमाम लुधियाना ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कौमी एकता, आपसी भाईचारे और देश की अखंडता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
शाही इमाम का बयान और सोशल मीडिया पर अपील
समारोह के मुख्य अतिथि शाही इमाम ने अपने संबोधन में कहा कि जो व्यक्ति दूसरों को सम्मान, आत्मसम्मान, दया और सहायता प्रदान नहीं कर सकता, वह सच्चे अर्थों में मुसलमान नहीं हो सकता। भारत की मुख्य विशेषता अनेकता में एकता है। उन्होंने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर चेतावनी देते हुए अपील की कि समाज को बांटने वाली सामग्री से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भड़काऊ और समाज में फूट डालने वाले वीडियो को तत्काल डिलीट कर दिया जाना चाहिए तथा उन्हें आगे फॉरवर्ड बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की तरक्की के लिए लोगों को अपनी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। नफरत का प्रचार बिल्कुल नहीं करना चाहिए और किसी भी दूसरे धर्म को नीचा नहीं दिखाना चाहिए। सभी धर्मों के लोगों को समान सम्मान देना और देश की एकता-अखंडता को बनाए रखना आज के समय में बेहद जरूरी है।
देश का विभाजन और स्वतंत्रता का महत्व
शाही इमाम ने अपने संस्मरण का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके दादा मौलाना हबीबुर रहमान ने वीर सावरकर के साथ मिलकर देश के विभाजन का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने देशहित में सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमें मीनार नहीं, बल्कि नींव का पत्थर बनने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही महिलाओं और बेटियों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन देश की स्वतंत्रता और अखंडता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
विभिन्न धर्मों के विद्वानों के विचार
आर्य समाज के विद्वान आचार्य कंवरपाल शास्त्री ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वेदों में पूरे संसार के कल्याण की कामना की गई है। उन्होंने सभी के सुखी, स्वस्थ और निरोगी रहने की कामना करते हुए कहा कि मनुष्य को हमेशा एक-दूसरे पर दया और सभी के हित की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि परिंदे भी इंसानों से बेहतर संदेश देते हैं, जो कभी मस्जिद तो कभी मंदिर पर जाकर बैठते हैं। स्थानीय चर्च के पादरी सुशील कुमार ने कहा कि यदि जीवन में प्रेम नहीं है तो सब कुछ व्यर्थ है। प्रेम ही इंसान को सही जीवन जीने की राह दिखाता है। उन्होंने जरूरतमंदों की सेवा को सच्ची ईश्वर सेवा बताते हुए कहा कि वतन सर्वोपरि है और अनुशासन से ही संविधान को शक्ति मिलती है। गुरुद्वारे के ग्रंथी ज्ञानी जनक सिंह ने कहा कि हम सभी एक ही परमात्मा की संतान हैं। आपसी मतभेद भुलाकर देश की उन्नति में सभी को सहयोग करना चाहिए। इस दौरान डॉ राजपाल पुंडीर ने कौमी तराना प्रस्तुत किया। एडवोकेट फरहा काज़ी, मौलाना सैयद मोहम्मद साद और रोशन अब्बास जैदी ने भी अपने विचार रखे, जबकि सुशील आर्य ने एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया।
सम्मान समारोह और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान काजी अदील अहमद एवं काजी नबील अहमद ने सभी विद्वानों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कौमी एकता कमेटी के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने विधायक मदन भैया का पत्र पढ़कर सभी को सुनाया तथा कमेटी की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। अशोक शर्मा, सत्येंद्र आर्य और हाजी इकबाल ने शाही इमाम सहित अन्य सभी अतिथियों को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कौमी एकता कमेटी के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने की तथा इसका कुशल संचालन संरक्षक सत्येंद्र आर्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुफ्ती मुजीब नदवी, डॉ सगीर हसन, सुशील गुर्जर, असजद सैफी, धर्म मसीह, वसीम अहमद, डॉ. शाहनवाज, धर्मेंद्र तोमर, वकील अहमद, एडवोकेट अनिल आर्य, रण सिंह आर्य, जयपाल सिंह, हाजी शाह नजर, दिलशाद और हाजी इकबाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।