गुरुग्राम में जगद्गुरु शंकराचार्य के मार्गदर्शन में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ, विश्व शांति की कामना

सनातन में शक्ति उपासना का विशेष महत्व-जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद
राष्ट्र की सुख-शांति तथा समस्त विश्व के कल्याण की कामना को अर्पित अनुष्ठान
मुख्य उद्देश्य लोककल्याण, राष्ट्र की उन्नति, शांति एवं समाज के मंगल की कामना
जगद्गुरु नरेंद्रानंद महाराज के मार्गदर्शन में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ
जनमानस की सुरक्षा, राष्ट्र की समृद्धि एवं विश्व शांति की कामना की जा रही
फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम, /01 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व होता है। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने यह बात कही है। उन्होंने बताया कि मां भगवती की आराधना और वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोककल्याण किया जाता है। इसके जरिए राष्ट्र की उन्नति और शांति की कामना की जाती है। समस्त मानव समाज के मंगल की कामना के लिए भी यह अनुष्ठान महत्वपूर्ण है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ इसी मुख्य भावना को पूरी तरह से समर्पित है।
यह महायज्ञ देश और विदेश के सनातनी हिंदुओं की रक्षा के लिए आयोजित हो रहा है। इसका उद्देश्य देवी आपदाओं से सनातन समाज की रक्षा करना है। राष्ट्र की सुख-शांति तथा समस्त विश्व के कल्याण की कामना भी इसमें शामिल है। यज्ञ के माध्यम से जनमानस की सुरक्षा और राष्ट्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा रही है। आयोजक मंडल के प्रवक्ता ने मीडिया को यह सारी जानकारी साझा की है।
यज्ञ मंडप में हुए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान
यज्ञ मंडप में सबसे पहले वरुण पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद गंगा पूजन और कलश पूजन की प्रक्रिया पूरी हुई। तदनंतर पंचांग पूजन और ब्राह्मण वरण का कार्य किया गया। षोडश मातृका और नवग्रह का आवाहन किया गया। क्षेत्रपाल सहित सभी 33 कोटि देवताओं की स्थापना की गई। इसके बाद विधि-विधान के साथ सभी देवताओं का पूजन संपन्न हुआ।
गंगाजल के साथ निकाली गई भव्य शोभायात्रा
पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में यह आयोजन हो रहा है। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में यह कार्य हो रहा है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ पूजन का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। सभी प्रक्रियाएं पूरी विधि-विधान के साथ शुरू की गईं। महायज्ञ के शुभारंभ के अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
यह शोभायात्रा सुबह आठ बजे शुलटंकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई। शोभायात्रा में गंगाजल भी शामिल किया गया था। सैकड़ों श्रद्धालु हाथों में कलश लेकर इस शोभायात्रा में शामिल हुए। धार्मिक जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार लगातार गूंजते रहे। यह शोभायात्रा आदि शंकराचार्य महासंस्थानम आश्रम पहुंचकर संपन्न हुई।
दुर्गा सप्तशती के पाठ का हुआ शुभारंभ
शोभायात्रा के संपन्न होने के बाद महायज्ञ की पूजन प्रक्रिया प्रारंभ हुई। पूजन के ठीक उपरांत सहस्त्र चंडी दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हुआ। यह पाठ आगामी 20 दिनों तक लगातार अनवरत चलता रहेगा। यज्ञाचार्य तेजमणि त्रिपाठी के नेतृत्व में यह अनुष्ठान हो रहा है। कुल 36 विद्वान ब्राह्मणों की देखरेख में यज्ञीय अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है।
भक्तिमय वातावरण से गूंजा आश्रम परिसर
महायज्ञ के दौरान लगातार वैदिक मंत्रोच्चार होते रहे। दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूरा आश्रम परिसर गूंज उठा। पूरा आश्रम परिसर एक भक्तिमय वातावरण से पूरी तरह से सुशोभित रहा। इस अवसर पर कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। स्वामी बृजभूषणनंद सरस्वती और सच्चिदानंद त्रिपाठी इस दौरान मौजूद रहे।
विनय कुमार मिश्रा और रामकुमार मिश्र भी वहां उपस्थित थे। क्षमा शंकर उपाध्याय और पन्नालाल मिश्र ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बाबूलाल मुंदर और अविनाश शुक्ल भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। जय प्रकाश तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु इस अवसर पर उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि यह महायज्ञ आगामी 20 दिनों तक लगातार चलेगा। इस दौरान विभिन्न वैदिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न होंगे।