गुरुग्राम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ: नेपाल और भारतवासियों की सुरक्षा के लिए दी गईं विशेष आहुतियां

नेपाल सहित भारतवासियों की सुरक्षा के लिए दी गईं विशेष आहुतियां
सहस्त्र चंडी महायज्ञ में वैदिक परंपरा के अनुसार अरणी मंथन कर अग्नि प्रकट
आहुतियां जनकल्याण, राष्ट्र सुरक्षा और समस्त प्राणियों के मंगल को समर्पित
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में महायज्ञ
सनातन परंपरा में ईश्वर से सभी के कल्याण और सुरक्षा की प्रार्थना आवश्यक
फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम, /02 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ पूजन को प्रातःकाल वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के बीच यज्ञीय अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्राचीन वैदिक परंपरा के अनुसार अरणी मंथन कर अग्नि प्रकट की गई। इसके पश्चात विधिवत यज्ञाग्नि की स्थापना कर वेदियों का पूजन, हवन एवं पाठ प्रारंभ किया गया। यह जानकारी संस्थान के प्रवक्ता के द्वारा मीडिया से जा सांझा की गई ।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोककल्याण और विश्व मंगल की कामना का माध्यम है। यज्ञीय परंपरा में मंत्रों के साथ दी जाने वाली आहुतियां जनकल्याण, राष्ट्र की सुरक्षा और समस्त प्राणियों के मंगल की भावना को समर्पित होती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक एवं दैवीय आपदाओं के कारण अनेक स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में सनातन परंपरा के अनुसार ईश्वर से सभी के कल्याण और सुरक्षा की प्रार्थना करना आवश्यक है। इसी भावना के साथ सहस्त्र चंडी महायज्ञ में नेपाल सहित समस्त भारतीयों के जन-जन की सुरक्षा, सुख-शांति और समृद्धि के लिए विशेष यज्ञ आहुतियां दी गईं।
वातावरण आध्यात्मिक एवं भक्तिमय हो उठा
प्रातःकाल अरणी मंथन के दौरान वैदिक आचार्यों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार किया गया। अरणी से प्रकट अग्नि को यज्ञाग्नि के रूप में स्थापित करने के बाद विभिन्न वेदियों का पूजन किया गया। इसके बाद हवन एवं पाठ का क्रम शुरू हुआ। यज्ञशाला में गूंजते वैदिक मंत्रों और स्वाहा के उच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं भक्तिमय हो उठा।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालुओं से सनातन धर्म की वैदिक परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण की भावना से धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक अनुष्ठान लोकमंगल की भावना से किए जाते हैं तो उनकी सार्थकता और भी बढ़ जाती है।
सामाजिक समरसता तथा विश्व कल्याण की कामना
महायज्ञ में देशवासियों की सुख-शांति, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, राष्ट्र की उन्नति, सामाजिक समरसता तथा विश्व कल्याण की कामना से आहुतियां दी गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं वैदिक विद्वान उपस्थित रहे। आगामी दिनों में भी महायज्ञ में विभिन्न वैदिक अनुष्ठान, पूजन, हवन एवं पाठ का क्रम जारी रहेगा। अरणी मंथन का कार्य डॉ विनय मिश्रा ने सपत्नीक किया सच्चिदानंद तिवारी यज्ञ आचार्य तेजमणि तिवारी के देखरेख में संपादित हो रहा है