श्री महावीर जैन पब्लिक स्कूल में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई संवत्सरी, विद्यार्थियों ने दी प्रस्तुतियां

श्री महावीर जैन पब्लिक स्कूल में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई संवत्सरी, विद्यार्थियों ने दी प्रस्तुतियां

कुरुक्षेत्र, 14 सितंबर। श्री महावीर जैन पब्लिक स्कूल में संवत्सरी पर्व श्रद्धा, उत्साह एवं आध्यात्मिक भाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भगवान महावीर की शिक्षाओं से परिचित कराना था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भगवान महावीर के बताए सत्य, अहिंसा, संयम और क्षमा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए नृत्य, भाषण और कविताएं

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नृत्य, भाषण एवं कविता वाचन के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन और उनकी महान शिक्षाओं को प्रस्तुत किया। कक्षा दसवीं की छात्रा खुशी ने एक कविता के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन एवं उनकी शिक्षाओं पर विशेष प्रकाश डाला। वहीं दूसरी और कक्षा चौथी के छात्र रश्वित ने एक भाषण के माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांतों और उनके जीवन में उनके महत्व को बहुत प्रभावशाली ढंग से सभी के सामने प्रस्तुत किया।

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भजन और नृत्य के माध्यम से दिया क्षमा का संदेश

कक्षा सातवीं के विद्यार्थियों द्वारा एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया गया जिसके बोल ‘गुरु वचनों को रखना संभाल के’ थे। इस भजन ने पूरे स्कूल के वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। विद्यार्थियों ने ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ पर एक मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य के माध्यम से उन्होंने क्षमा याचना के महत्व को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से उजागर किया। इन सभी प्रस्तुतियों ने स्कूल में मौजूद सभी लोगों को आत्मचिंतन करने और जाने-अनजाने में हुई अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगने की गहरी प्रेरणा दी। इस पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन पिंकी कौशिक द्वारा बहुत ही प्रभावशाली ढंग से किया गया।

प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों को दिए प्रेरणादायक विचार

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पूजा शर्मा ने सभी विद्यार्थियों को संवत्सरी पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस पावन पर्व का सबसे महत्वपूर्ण संदेश केवल ‘क्षमा’ ही है। हमें अपने जीवन में हमेशा क्षमा के भाव को धारण करना चाहिए। हमें जाने-अनजाने में हुई अपनी गलतियों के लिए दूसरों से क्षमा माँगनी चाहिए और साथ ही दूसरों की गलतियों को भी क्षमा करने की भावना अपने अंदर विकसित करनी चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को यह भी प्रेरित किया कि वे भगवान महावीर के सिद्धांतों को केवल सुनने तक ही सीमित न रखें। उन्हें इन सिद्धांतों को अपने दैनिक व्यवहार और अपने जीवन में पूरी तरह से उतारना चाहिए। इस कार्यक्रम ने सभी विद्यार्थियों में आध्यात्मिक मूल्यों, आत्मचिंतन और क्षमाभाव की भावना को और अधिक मजबूत किया।

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