संगम विहार हत्याकांड: 22 साल का रिश्ता, संपत्ति का लालच और खौफनाक साजिश की पूरी कहानी

संगम विहार हत्याकांड की पूरी कहानी
नई दिल्ली/12 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
दिल्ली के संगम विहार इलाके की तंग गलियों में एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत और रिश्तों पर से लोगों का भरोसा उठा दिया है। 22 साल तक साथ रहने के बाद एक पत्नी ने ही अपने पति की जान ले ली। यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं है, बल्कि लालच, धोखे और अंधे प्यार में अंधी हुई एक औरत की है।
संगम विहार के एल-ब्लॉक में 55 साल के मुन्ना लाल का तीन मंजिला मकान बना हुआ है। मुन्ना लाल एक बेहद शांत और सीधे-सादे इंसान थे। उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मेहनत और मजदूरी में बिताया था। बड़ी मुश्किल से पाई-पाई जोड़कर उन्होंने संगम विहार में यह तीन मंजिला मकान खड़ा किया था।
करीब 22 साल पहले मुन्ना लाल की शादी मंजू से हुई थी। शादी के शुरुआती सालों में सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, दोनों की सोच और उम्मीदों में फर्क आने लगा। मुन्ना लाल अब ढलती उम्र में शांति से जीना चाहते थे, लेकिन मंजू की ख्वाहिशें अलग थीं।
संगम विहार में स्थित मुन्ना लाल के उस तीन मंजिला मकान की कीमत आज के समय में करोड़ों रुपये हो चुकी थी। मुन्ना लाल को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस मकान को उन्होंने खून-पसीने से बनाया है, वही मकान एक दिन उनकी मौत की सबसे बड़ी वजह बन जाएगा।
कुछ महीने पहले मंजू की मुलाकात चमन नाम के एक युवक से हुई। चमन की उम्र मंजू से लगभग आधी थी। शुरुआत में चमन का मुन्ना लाल के घर आना-जाना एक सामान्य जान-पहचान के तौर पर हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे मंजू और चमन के बीच की यह बातचीत एक अवैध संबंध में बदल गई।
मंजू को चमन के साथ में एक नया आकर्षण दिखाई देता था। वहीं दूसरी तरफ चमन की नजर मुन्ना लाल की करोड़ों की संपत्ति पर लगी हुई थी। मुन्ना लाल जब भी काम के सिलसिले में घर से बाहर जाते, मंजू और चमन आपस में मिलते रहते थे। संगम विहार के उस घर में धीरे-धीरे एक साजिश जन्म ले रही थी।
दोनों को लगने लगा कि जब तक मुन्ना लाल जिंदा हैं, तब तक वे न तो खुलकर एक-साथ रह सकते हैं और न ही उस मकान के मालिक बन सकते हैं। मंजू के सिर पर संपत्ति पाने का लालच और चमन के प्रति अंधा प्यार इस कदर सवार हो चुका था कि उसने अपने पति को रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
मुन्ना लाल को रास्ते से हटाने के लिए मंजू ने चमन को 5 लाख रुपये देने का वादा किया। उसने चमन से कहा कि मुन्ना के खत्म होते ही यह पूरी प्रॉपर्टी उनकी हो जाएगी। चमन अकेले इस काम को अंजाम देने से डर रहा था, इसलिए उसने अपने दोस्त किशन को भी इस साजिश में शामिल कर लिया।
तीनों ने मिलकर हत्या का एक ऐसा तरीका सोचा जिससे पुलिस को यह मामला चोरी का लगे। उन्होंने तय किया कि मुन्ना लाल को इस तरह मारा जाएगा कि किसी को कोई शक न हो। हत्या को अंजाम देने के लिए 10 अगस्त की रात तय की गई।
10 अगस्त की शाम को मुन्ना लाल रोज की तरह काम खत्म करके थके-हाारे अपने घर लौटे। रात के खाने का समय हुआ तो मंजू चुपके से रसोई में गई और मुन्ना लाल के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं। बिना किसी शक के मुन्ना लाल ने खाना खाया और कुछ ही देर में वे गहरी नींद में सो गए।
जब रात गहरा गई और पूरी गली में सन्नाटा छा गया, तब मंजू ने घर का मुख्य दरवाजा खोल दिया। बाहर चमन और उसका साथी किशन पहले से इंतजार कर रहे थे। दोनों दबे पांव घर के अंदर दाखिल हुए और उस कमरे में पहुंचे जहाँ मुन्ना लाल बेसुध पड़े थे।
मंजू, चमन और किशन ने मुन्ना लाल को मारने के लिए बिजली के तारों का इंतजाम किया था। उन्होंने नींद में सो रहे मुन्ना लाल के शरीर से नंगे तार छुआकर उन्हें बिजली का भारी झटका दिया। करंट लगने से मुन्ना लाल का शरीर तड़प उठा, लेकिन नींद की गोलियों के असर के कारण वे चिल्ला भी नहीं पाए।
करंट देने के बाद भी जब मंजू को लगा कि मुन्ना लाल की सांसें चल रही हैं, तो उसने चमन से काम पूरा करने को कहा। चमन ने पास में पड़ी एक मजबूत रस्सी उठाई और मुन्ना लाल के गले में कस दी। कुछ ही मिनटों में मुन्ना लाल की सांसें थम गईं और 22 साल का रिश्ता खत्म हो गया।
कत्ल करने के बाद तीनों ने पुलिस को गुमराह करने का नाटक शुरू किया। मंजू के कहने पर चमन और किशन ने अलमारियों के ताले तोड़े, कपड़े बाहर फेंके और सामान इधर-उधर बिखेर दिया। मकसद यह था कि सुबह पुलिस को यह सब किसी चोर-लुटेरे का काम लगे।
काम खत्म करने के बाद चमन और किशन रात के अंधेरे में वहां से फरार हो गए। सुबह होते ही मंजू रोते-बिलखते हुए घर से बाहर निकली और पड़ोसियों को इकट्ठा कर लिया। उसने रोते हुए कहा कि रात में चोर घर में घुस आए थे और उन्होंने चोरी के दौरान मुन्ना लाल को मार डाला।
घटना की खबर मिलते ही संगम विहार थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुँची। शुरुआत में तो पूरा मामला चोरी के दौरान हुई हत्या का ही लग रहा था। लेकिन जब पुलिस ने बारीकी से जांच की, तो उन्हें कई बातों पर गहरा शक होने लगा।
कमरे में सामान बिखरा हुआ था, लेकिन अलमारी में रखी सबसे कीमती चीजों को किसी ने छुआ तक नहीं था। घर का मुख्य दरवाजा भी बिना तोड़े खोला गया था। इसके अलावा, पुलिस को मंजू के व्यवहार पर भी संदेह हुआ क्योंकि उसके चेहरे पर पति को खोने का असली गम नहीं दिख रहा था।
जब पुलिस ने शव का पंचनामा किया, तो मुन्ना लाल के गले पर रस्सी के निशान के साथ-साथ शरीर पर बिजली से जलने के निशान भी मिले। पुलिस समझ गई कि नींद की गोलियां, बिजली का करंट और फंदा लगाकर हत्या करना किसी आम चोर का काम नहीं हो सकता। यह किसी अपने की सोची-समझी साजिश थी।
पुलिस ने तुरंत मंजू को हिरासत में लिया और कड़ाई से पूछताछ शुरू की। जब पुलिस ने मंजू के फोन की कॉल डिटेल निकाली, तो एक नंबर ऐसा मिला जिस पर उस रात कई बार बात की गई थी। वह नंबर चमन का था।
जब पुलिस ने चमन के बारे में मंजू से सवाल पूछे, तो वह घबरा गई और ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल सकी। उसने टूटकर अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। उसने माना कि 5 लाख रुपये और संपत्ति के लिए उसने प्रेमी चमन और उसके दोस्त किशन के साथ मिलकर यह कत्ल किया है।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रेमी चमन और उसके साथी किशन को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कत्ल में इस्तेमाल की गई रस्सी और अन्य सबूत भी बरामद कर लिए। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
रिश्तों में धोखे और हत्या की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले मेरठ के चर्चित 'नीला ड्रम कांड' में भी अवैध संबंधों के चक्कर में पति की हत्या कर दी गई थी। वहीं पुणे के लोहागढ़ किला क्षेत्र में हुई हत्या और आगरा के फर्श के नीचे पति को दफनाने की घटना ने भी पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
संगम विहार की यह घटना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों को दर्शाती है। जिस मुन्ना लाल ने अपनी पूरी जिंदगी पाई-पाई जोड़कर मकान बनाने में लगा दी, उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसका अपना घर ही उसकी कब्र बन जाएगा। लालच और अवैध संबंधों ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया।