तोशाम में संस्कृत भारती के 25 संस्कृत संभाषण शिविरों का हुआ समापन, 650 से अधिक लोगों ने सीखी संस्कृत

तोशाम में संस्कृत भारती के 25 संस्कृत संभाषण शिविरों का हुआ समापन, 650 से अधिक लोगों ने सीखी संस्कृत

संस्कृत भारती द्वारा आयोजित 21 संस्कृत सम्भाषण शिविरों के समापन पर आयोजित हुआ समारोह

विष्णु शास्त्री/तोशाम/13 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

संस्कृत भारती हरियाणा न्यास द्वारा भिवानी विभाग में 21 संस्कृत संभाषण शिविरों का अभियान 1 सितंबर से 12 सितंबर तक चलाया गया था। इन सभी शिविरों का समापन समारोह रविवार को भिवानी के बाबा जहरगिरि आश्रम में मनाया गया।

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  • भिवानी विभाग द्वारा 21 शिविरों का लक्ष्य लिया गया था लेकिन कुल 25 शिविर चलाए गए।
  • इन शिविरों में 650 से भी अधिक लोगों ने संस्कृत में बोलना सीखा।
  • भिवानी जिले में 13, दादरी में तीन और महेंद्रगढ़ में सात शिविर चलाए गए।

समारोह में पहुंचे प्रमुख अतिथि और वक्ता

इस समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भिवानी-महेंद्रगढ़ सांसद चौ. धर्मवीर सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में धर्मवीर तथा सावित्री यादव विवेकानन्द विद्यालय निदेशिका रहीं। मुख्य वक्ता के रूप में उत्तरक्षेत्रीय संगठन मंत्री नरेंद्र उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में पावन सान्निध्य महन्त डॉ. अशोक गिरि महाराज का रहा।

शिविरों की विशेषता और जनभागीदारी

इन शिविरों में आबाल से वृद्ध तक, विद्यालयीय छात्रों, महाविद्यालयीय छात्रों तथा सामाजिक लोगों ने संस्कृत सीखने के लिए भाग लिया। भिवानी जिले में 13 शिविर, दादरी में तीन और महेंद्रगढ़ में सात शिविर चलाए गए। इन सभी शिविरों में 650 से भी अधिक लोगों ने संस्कृत में बोलना सीखा

अतिथियों के विचार और आह्वान

इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद चौ. धर्मवीर सिंह ने संस्कृत के विषय में बताया कि संस्कृत हमारी धरोहर है और हम सब का कर्तव्य बनता है कि हम संस्कृत के साथ-साथ लोगों को भी संस्कारित करें। उन्होंने इस पृथ्वी की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कृषि में अत्यधिक केमिकल का प्रयोग न करने के लिए भी लोगों को जागरूक किया। इसी अवसर पर मुख्य वक्ता ने विभिन्न स्थानों से आए हुए शिविरार्थियों को संस्कृत का क्या महत्व है, यह बताते हुए कहा कि जन्म से संस्कृत का महत्व शुरू होता है और हमारी मृत्यु पर्यंत संस्कृत का विशेष महत्व रहता है। इसी श्रृंखला में सावित्री यादव ने भी अपने विचार रखे और कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है इसलिए हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है कि हम इस भाषा का संरक्षण करें।

शिविरार्थियों के अनुभव और सहयोगी गणमान्य

इन सभी शिविरों के संयोजक तोशाम के चौ. बंसीलाल राजकीय महिला महाविद्यालय में कार्यरत डॉ. जयपाल शास्त्री ने बताया कि इन सभी शिविरों में जो विद्यार्थी आए थे, उन सभी ने अपना अनुभव संस्कृत में बतलाया, गीत संस्कृत में गाए और विभिन्न स्तोत्रों के माध्यम से संस्कृत का महत्व बतलाया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रांत मंत्री प्रमोद, प्रांत संगठन मंत्री देवांश, विभाग संयोजक रंजीत, विभाग संपर्क प्रमुख अशोक बुचौली, जिला संयोजक सुरेंद्र, सह जिला संयोजक सोमवीर, राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत अशोक भारद्वाज, बसंत आचार्य कार्तिक, डॉ. पवन कनीना व अन्य गणमान्य लोगों की अहम भूमिका रही।

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