सारंगपुर में तिलभांडेश्वर महादेव का सावन अनुष्ठान संपन्न

सारंगपुर में तिलभांडेश्वर महादेव का सावन अनुष्ठान संपन्न

सारंगपुर में तिलभांडेश्वर महादेव का सावन अनुष्ठान संपन्न

मालवा की पुण्यधरा पर स्थित सारंगपुर शहर के नगर सेठ कहे जाने वाले अति-प्राचीन तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में सावन माह के अलौकिक अनुष्ठान का रविवार को विधि-विधान और पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन भोर की पहली किरण के साथ ही महादेव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरे मंदिर प्रांगण में हर तरफ बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी, जिससे पूरा माहौल शिवमय हो उठा।

सारंगपुर/मध्य प्रदेश/30 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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सारंगपुर। मालवा अंचल के सारंगपुर नगर में आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में सावन माह के दौरान चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों का रविवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। महादेव के दर्शन और पूजा के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं।

मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। इस दौरान हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। सावन के अंतिम धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया।

30 वर्षों से सावन में रुद्राभिषेक की परंपरा

तिलभांडेश्वर महादेव सेवा समिति से मिली जानकारी के अनुसार मंदिर में पिछले करीब 30 वर्षों से सावन माह के दौरान नियमित रूप से रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस परंपरा को समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं की ओर से लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस वर्ष भी सावन के पूरे महीने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा। समिति के अनुसार प्रतिदिन सुबह मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे। सुबह के समय होने वाली मंगला आरती में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते रहे।

सावन के दौरान भगवान शिव के जलाभिषेक और रुद्राभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई भक्त परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर सुख-शांति तथा परिवार की मंगलकामना की।

सुबह से मंदिर पहुंचने लगे श्रद्धालु

सावन के अंतिम आयोजन को लेकर रविवार को मंदिर में सुबह से ही विशेष तैयारी की गई थी। मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। समय बढ़ने के साथ मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ती गई।

दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से मंदिर तक पहुंचाया गया। कई लोग भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करते दिखाई दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

धार्मिक आयोजन होने के कारण मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धा और अनुशासन का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा के बाद कुछ समय मंदिर परिसर में बिताया और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक हवन की पूर्णाहुति

रविवार को सावन माह के विशेष अनुष्ठान की पूर्णाहुति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराई गई। पंडित गोकुल प्रसाद शर्मा के मुखारविंद से मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक और हवन की पूर्णाहुति संपन्न हुई।

धार्मिक परंपरा के अनुसार अनुष्ठान के समापन पर भगवान शिव की आराधना की गई। इसके बाद मंदिर में महाआरती का आयोजन हुआ। महाआरती में मौजूद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव की पूजा की।

आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। पूर्णाहुति के बाद समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की गई थी।

कन्या और ब्राह्मण भोज का आयोजन

सावन अनुष्ठान की पूर्णाहुति के अवसर पर कन्या एवं ब्राह्मण भोज का भी आयोजन किया गया। समिति की ओर से इसे धार्मिक परंपरा के अनुसार संपन्न कराया गया।

आयोजन में कन्याओं और ब्राह्मणों को भोजन कराया गया। समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था में सहयोग किया। धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सहभागिता का भी यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

भोजन के बाद मंदिर में महाप्रसाद वितरण किया गया। समिति के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे सावन माह की धार्मिक गतिविधियों का समापन अवसर बताया।

महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में बांटा महाप्रसाद

पूर्णाहुति के बाद आयोजित महाआरती में मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा। आरती के दौरान भक्तों ने भगवान शिव की आराधना की। इसके बाद मौजूद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

महाप्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगीं। समिति के सदस्यों ने व्यवस्था संभालते हुए लोगों तक प्रसाद पहुंचाया। आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया।

सावन माह में धार्मिक आयोजनों के दौरान सामूहिक पूजा और प्रसाद वितरण की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। सारंगपुर के इस आयोजन में भी धार्मिक आस्था के साथ सामुदायिक सहभागिता नजर आई।

समिति पदाधिकारियों और सदस्यों की रही भूमिका

तिलभांडेश्वर महादेव सेवा समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पूरे सावन माह के आयोजन में व्यवस्थाओं को संभालने में भूमिका निभाई। समिति के अनुसार करीब तीन दशक से चली आ रही इस परंपरा को इस वर्ष भी नियमित रूप से आयोजित किया गया।

आयोजन में समिति अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, वरिष्ठ सलाहकार प्रकाश सोनी गुजराती, वरिष्ठ सलाहकार संजय व्यास और कोषाध्यक्ष संतोष पुष्पद सहित कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

इसके अलावा रामू चौरसिया, पंडित गोपाल वैद्य, राजू पुष्पद, राहुल राठौर, बद्रीलाल पाटीदार, रामनारायण पुष्पद, दीपक शर्मा, राजेंद्र माहेश्वरी और शत्रुघ्न पुष्पद सहित अन्य लोगों ने भी आयोजन में भाग लिया।

समिति से जुड़े लोगों ने सावन के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का आभार जताया।

तीन दशक से जारी धार्मिक परंपरा

तिलभांडेश्वर महादेव सेवा समिति के अनुसार सावन में रुद्राभिषेक की यह परंपरा पिछले करीब 30 वर्षों से जारी है। इस दौरान हर साल सावन माह में मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

समिति के सदस्यों का कहना है कि इस परंपरा का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना का अवसर उपलब्ध कराना है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों के लिए इस तरह के आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव का भी माध्यम बनते हैं। एक ही स्थान पर अलग-अलग परिवारों और वर्गों के लोग पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।

सारंगपुर की धार्मिक पहचान से जुड़ा मंदिर

सारंगपुर और आसपास के क्षेत्र में कई धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। राजगढ़ जिला प्रशासन की पर्यटन जानकारी में भी सारंगपुर क्षेत्र के कपिलेश्वर महादेव मंदिर को धार्मिक और आस्था के केंद्र के रूप में दर्ज किया गया है। यह मंदिर कालीसिंध नदी के बीच स्थित होने के कारण अपनी भौगोलिक और धार्मिक विशेषता के लिए जाना जाता है।

इसी धार्मिक परिवेश में स्थानीय स्तर पर तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताया जाता है। सावन के दौरान मंदिर में विशेष पूजा और रुद्राभिषेक का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बनता है।

मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं को श्रद्धालु अपनी धार्मिक आस्था के रूप में देखते हैं। ऐसी मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में ही समझना उचित है, जबकि उनके ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाणों को अलग विषय माना जाना चाहिए।

सावन में बढ़ जाता है धार्मिक उत्साह

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं।

सारंगपुर में भी सावन के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। सुबह के समय पूजा और दर्शन के लिए आने वाले लोगों में बड़ी संख्या स्थानीय श्रद्धालुओं की रहती है।

कई परिवार सावन के सोमवार और अन्य शुभ अवसरों पर भगवान शिव की पूजा करने मंदिर पहुंचते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे सावन में नियमित पूजा करते हैं, जबकि कई लोग अंतिम सोमवार या पूर्णाहुति के अवसर पर मंदिर पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों की भागीदारी से आयोजन सफल

तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित सावन अनुष्ठान के अंतिम दिन समिति के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी दिखाई दी। धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करने के लिए कई लोग मौजूद रहे।

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, प्रसाद वितरण और धार्मिक कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में समिति के सदस्यों ने जिम्मेदारी संभाली। पूर्णाहुति के बाद आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

समिति से जुड़े लोगों के अनुसार आने वाले वर्षों में भी सावन माह की इस धार्मिक परंपरा को जारी रखने का प्रयास किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भागीदारी को इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत माना गया।

आस्था के साथ जुड़ी है स्थानीय परंपरा

तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच लंबे समय से आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में आसपास के क्षेत्र के लोग भी भाग लेते हैं।

सावन के दौरान रुद्राभिषेक की नियमित परंपरा ने मंदिर को स्थानीय धार्मिक गतिविधियों का एक प्रमुख स्थान बनाया है। करीब तीन दशक से जारी आयोजन इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक परंपराएं किस तरह स्थानीय समुदाय के सहयोग से आगे बढ़ती हैं।

रविवार को पूर्णाहुति के साथ इस वर्ष का सावन अनुष्ठान संपन्न हो गया। इसके बाद भी मंदिर में नियमित दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा।

जयकारों के साथ हुआ आयोजन का समापन

सावन अनुष्ठान के अंतिम दिन सुबह से लेकर महाआरती और प्रसाद वितरण तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और आरती के बीच धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।

पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन किए और महाप्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे सुनाई देते रहे।

करीब 30 वर्षों से चली आ रही रुद्राभिषेक की परंपरा के एक और वर्ष का समापन इसी धार्मिक वातावरण में हुआ। समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया।

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