शंकराचार्य नरेंद्रानंद बोले: सनातन साधना में महाविद्याओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व

काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि सनातन धर्म की साधना परंपरा में महाविद्याओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। उन्होंने यह भी कहा कि मां कमला केवल भौतिक जगत में केवल मात्र संपन्नता की देवी नहीं हैं। मां कमला जीवन में संतुलन, सद्बुद्धि, संतोष और धर्मसम्मत समृद्धि की प्रेरणा प्रदान करती हैं। यज्ञ एवं देवी उपासना का मूल उद्देश्य जगत के कल्याण की भावना को मजबूत करना होता है। लोकमंगल की भावना का विस्तार हो, यही इस अनुष्ठान की प्रमुख कामना है। यह जानकारी आयोजक मंडल के प्रवक्ता के द्वारा दी गई है।
सहस्त्र चंडी महायज्ञ और देवी के विभिन्न स्वरूप
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रत्येक दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से शक्ति के विविध आयामों का स्मरण किया जा रहा है। मां कमलात्मिका की उपासना से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोकमंगल की भावना का विस्तार होता है। यही इस अनुष्ठान की प्रमुख कामना है। इस दौरान कमलात्मिका की विधिवत आराधना की गई और विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।
दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या मां कमलात्मिका का पूजन
दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित मां कमलात्मिका यानी कमला को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मां कमला को ऐश्वर्य, वैभव एवं भौतिक सुख-सुविधाओं की अधिष्ठात्री माना जाता है। कमल पर विराजमान मां कमला शांति, सौभाग्य, संपन्नता और आध्यात्मिक उन्नति की प्रतीक मानी जाती हैं। महायज्ञ के दसवें दिन उनके पूजन के माध्यम से विश्व कल्याण की कामना की गई। राष्ट्र की समृद्धि, समाज में सुख-शांति तथा सभी श्रद्धालुओं के जीवन में मंगल एवं ऐश्वर्य की कामना की गई है।
मां कमला का आवाहन, पूजन और हवन
पूजन के दौरान यज्ञ वेदी पर विशेष पूजन सामग्री से मां कमला का आवाहन एवं पूजन किया गया। इसके बाद विधिवत हवन करते हुए वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक मां कमलात्मिका के दर्शन-पूजन किए। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति एवं जनकल्याण के लिए प्रार्थना की है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ के क्रम में आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। यह सभी धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं।
भगवती देवी का 16 प्रचार से पूजन अर्चन वंदन
मौके पर विनय मिश्रा और पन्नालाल मिश्र भदोही से सपत्नीक उपस्थित रहे। सरोज अग्रवाल बलिया से सपत्नीक उपस्थित रहीं। महंतश्री अवध बिहारी दास, महंतश्री रामेश्वर दास, महंतश्री विद्यभूषण दास, महंत कोतवाल श्रीमोहनदास और महंत श्री भगवान दास उपस्थित रहे। संतों और महंतों ने यज्ञ का परिक्रमा किया और यज्ञ में आहुतियां दिया। संतों और महंतों ने भगवती देवी का 16 प्रचार से पूजन अर्चन वंदन किया। बृजभूषणानंद, रामलखन नागा और सच्चिदानंद तिवारी आदि पूजन अनुष्ठान में सम्मिलित हुए। यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी, पेशक विवेकनंदगिरि सहित अन्य प्रकांड साधु विद्वान मौजूद रहे।