जनता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेलरखा में शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों ने दी भव्य प्रस्तुतियां,

शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से गुरुजनों का किया सम्मान।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है-सुनीता मोर।
किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है-सतपाल जागलान ।
नरेंद्र जेठी /नरवाना शहर /05 सितंबर 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
नरवाना में शिक्षक दिवस के अवसर पर जनता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेलरखा में एक भव्य, भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुरुजनों का सम्मान किया। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है और शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां और गुरु-शिष्य संबंध
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने अध्यापकों के सम्मान में शिक्षक के जीवन, उनके त्याग, समर्पण, संघर्ष एवं विद्यार्थी के भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका पर आधारित अनेक सुंदर प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने भाषण, कविताओं, संवादों एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए विचारों ने उपस्थित सभी अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को भाव-विभोर कर दिया।
सतपाल जागलान और सुनीता मोर के विचार
इस अवसर पर विद्यालय के संस्थापक सतपाल जागलान ने शिक्षक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक समाज का वह दीपक है जो स्वयं प्रकाशमान रहकर अनेकों विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान एवं संस्कारों के प्रकाश से प्रकाशित करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। एक श्रेष्ठ शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास, मेहनत और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुनीता मोर ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक वास्तव में भगवान के उस रूप के समान हैं जो विद्यार्थी को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सफलता के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक का सबसे बड़ा सम्मान उसके विद्यार्थियों की सफलता और उनके अच्छे संस्कार हैं।
प्रदीप गोयत द्वारा शिक्षकों का अभिनंदन
विद्यालय के संचालक प्रदीप गोयत ने सभी अध्यापकों के समर्पण, मेहनत एवं विद्यालय के विकास में उनके श्रेष्ठ योगदान की सराहना की। उन्होंने सभी अध्यापकों को उपहार भेंट कर उनका सम्मान एवं अभिनंदन किया तथा उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय की सफलता के पीछे शिक्षकों की मेहनत, लगन और निष्ठा सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक उनके लिए केवल कक्षा में पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं बल्कि जीवन के हर मोड़ पर सही राह दिखाने वाले मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच सम्मान, प्रेम, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा को और मजबूत किया तथा पूरा विद्यालय परिसर गुरुजनों के सम्मान और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से भावनाओं एवं उत्साह से सराबोर नजर आया।