हरियाणा के शिवालिक जंगलों में वन्यजीव सर्वेक्षण: तेंदुए समेत 423 वन्यजीव संकेत मिले, विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट

हरियाणा के शिवालिक जंगलों में वन्यजीव सर्वेक्षण: तेंदुए समेत 423 वन्यजीव संकेत मिले, विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट

हरियाणा के शिवालिक जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर विधानसभा में बड़े आंकड़े सामने आए हैं। यह जानकारी जगाधरी से कांग्रेस विधायक चौधरी अकरम खान के विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई है। वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने विधानसभा में यह रिपोर्ट पेश की है।

शिवालिक क्षेत्र में वन्यजीव सर्वेक्षण के आंकड़े

हरियाणा के शिवालिक क्षेत्र में किए गए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान कुल 423 वन्यजीव संकेत दर्ज किए गए हैं। इन सभी संकेतों में सबसे ज्यादा संकेत तेंदुए के मिले हैं। सर्वेक्षण के दौरान तेंदुए की मौजूदगी के 76 संकेत दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा सांभर और नीलगाय के 60-60 संकेत मिले हैं। मोर, लाल जंगली मुर्गा, जंगली सूअर, चीतल और काकड़ समेत कई अन्य प्रजातियों की मौजूदगी के संकेत भी मिले हैं।

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कलेसर राष्ट्रीय उद्यान से जुड़े तथ्य

जवाब का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये आंकड़े केवल कलेसर राष्ट्रीय उद्यान या कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के नहीं हैं। सरकार के मुताबिक कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के लिए अलग से कोई वन्यजीव सर्वेक्षण नहीं कराया गया था। उपलब्ध कराए गए आंकड़े पूरे शिवालिक क्षेत्र में किए गए संकेत सर्वेक्षण के हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान का सर्वेक्षण

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने हरियाणा वन विभाग के सहयोग से 28 फरवरी से 7 मार्च 2022 तक शिवालिक क्षेत्र का व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण किया था। इसमें अलग-अलग स्थानों पर कैमरा ट्रैपिंग के साथ वन्यजीवों के पगमार्क, खुर के निशान, मल और पेलेट्स जैसे संकेतों को दर्ज किया गया था।

विभिन्न वन्यजीवों के मिले संकेतों की पूरी सूची

इस सर्वेक्षण में तेंदुए के 76 संकेत मिले, जो सभी दर्ज प्रजातियों में सबसे अधिक थे। इसके बाद सांभर और नीलगाय के 60-60 संकेत दर्ज किए गए। मोर के 49, लाल जंगली मुर्गे के 42, जंगली सूअर के 29, चीतल के 22 और काकड़ यानी भौंकने वाले हिरण के 21 संकेत मिले। शिवालिक के जंगल में हिमालयी गोरल के 20, ग्रे लंगूर के 17, खरगोश के 11, साही के नौ, सुनहरे सियार के चार और कलीज तीतर के तीन संकेत भी दर्ज किए गए। इन सभी को मिलाकर वन्यजीव संकेतों की कुल संख्या 423 रही। 423 का यह आंकड़ा जानवरों की वास्तविक संख्या नहीं है, बल्कि यह सर्वेक्षण के दौरान मिले संकेतों की संख्या है। इसी तरह तेंदुए के 76 संकेत का अर्थ 76 तेंदुए होना नहीं है। सरकार के जवाब में इसे संकेत सर्वेक्षण के रूप में दर्ज किया गया है।

वन्यजीव निगरानी और वाहनों का आवंटन

वन्यजीवों की निगरानी करने और अवैध शिकार को रोकने के लिए सरकार ने वन्यजीव विभाग को 28 कार और जीप तथा 40 मोटरसाइकिलें आवंटित की हैं। यानी फील्ड मॉनिटरिंग के लिए विभाग को कुल 68 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।

जैव विविधता के लिहाज से महत्व

विधानसभा में सामने आए आंकड़ों से इतना जरूर साफ है कि शिवालिक क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। तेंदुए से लेकर सांभर, नीलगाय, चीतल, काकड़ और हिमालयी गोरल जैसे वन्यजीवों के संकेत मिले हैं। पक्षियों में मोर, लाल जंगली मुर्गा और कलीज तीतर की मौजूदगी दर्ज हुई है, जबकि सुनहरे सियार, साही और खरगोश जैसे वन्यजीवों के संकेत भी सर्वेक्षण में सामने आए हैं।

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