लाडवा के प्राचीन हनुमान मंदिर में श्री राम कथा का शुभारंभ, संत देवी सुदीक्षा ने दिए आदर्श जीवन के संदेश

भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए: संत देवी सुदीक्षा
प्राचीन हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा का शुभारंभ, 23 अगस्त तक चलेगी श्रीराम कथा
लाडवा/ 18 अगस्त2026/मानव गर्ग/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
लाडवा के प्राचीन हनुमान मंदिर में श्री सरस्वती सत्संग सभा लाडवा की ओर से आयोजित श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन संत देवी सुदीक्षा जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों तथा राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। कथा के दौरान मंदिर परिसर में जय श्रीराम के जयघोष और भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
संत देवी सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानव समाज के लिए आदर्श है। उन्होंने सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और धर्म का पालन करते हुए समाज के सामने श्रेष्ठ आचरण की मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके संदेश और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण मनुष्य के मन को शांति प्रदान करता है और उसे सद्कर्मों की ओर प्रेरित करता है। धार्मिक आयोजन व्यक्ति को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोडऩे का कार्य करते हैं। परिवार एवं समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और संस्कारों को मजबूत करने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं श्री सरस्वती सत्संग सभा के प्रधान गोपीचंद रहेजा ने बताया कि सावन मास पर श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्राचीन हनुमान मंदिर में 18 अगस्त से 23 अगस्त तक श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है।
प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे सत्संग एवं श्रीराम कथा होगी। उन्होंने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में पहुंचकर संतों के प्रवचन सुनने और धार्मिक आयोजन का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि 23 अगस्त को दोपहर 12 बजे भंडारे का आयोजन किया जाएगा। वहीं कथा के समापन पर हेल्पिंग हैंड संस्था के प्रधान आरडी अरोड़ा को संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं नेक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। मौके पर सोमप्रकाश शर्मा, आरडी अरोड़ा, हरिन्द्र गोयल, रामकुमार, नरेन्द्र सेन आदि मौजूद थे।