तरावड़ी में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने युवाओं को दिए संस्कार

तरावड़ी में शिव शक्ति इंटर ग्लोब एक्सपोर्ट प्रा. लि. की ओर से अनाज मंडी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को भव्य समापन हो गया है। इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। पूरी अनाज मंडी का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया। चारों ओर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे और भजनों की गूंज सुनाई दी। सुंदर धार्मिक झांकियों ने वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और उन्हें भाव-विभोर कर दिया।
पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक ज्ञान दिया। उन्होंने परिवार, रिश्तों, संस्कारों, युवाओं की जिम्मेदारी और समाज की विकृतियों से बचने का संदेश भी दिया। अंतिम दिवस कथा पंडाल में उमड़ी भारी भीड़ ने इस आयोजन की भव्यता को और अधिक बढ़ा दिया। महाराज जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं है। कथा की सीख को अपने जीवन में उतारना सबसे जरूरी है।
युवाओं को संबोधित करते हुए अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा कि पराई स्त्री पर बुरी नजर नहीं रखनी चाहिए। इसके साथ ही पराए पुरुष से भी कोई संबंध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़के और लड़कियां दोनों को अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहिए। जीवन में क्षणिक आकर्षण और प्रेम के चक्कर में पड़कर अपने भविष्य को दांव पर नहीं लगाना चाहिए। युवाओं को पढ़ाई, मेहनत और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान देना चाहिए।
महाराज जी ने महिला और पुरुष दोनों को अपनी मर्यादा में रहने की सख्त सलाह दी। परिवार की खुशहाली और समाज की मजबूती के लिए नारी और पुरुष दोनों का चरित्र में रहना बहुत जरूरी है। रिश्तों में विश्वास और सम्मान होने से ही मजबूत परिवार बनते हैं। मजबूत परिवारों से ही एक मजबूत समाज का निर्माण होता है। पूरे आयोजन के दौरान महाराज जी ने नशे और गलत संगत से बचने की प्रेरणा दी।
कथा के समापन अवसर पर सुंदर धार्मिक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा पंडाल राधे-राधे तथा जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। इस धार्मिक आयोजन ने तरावड़ी की धरती पर अध्यात्म की ऐसी गहरी छाप छोड़ी है जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे।