सिरसा में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के खिलाफ भड़के बिजली कर्मचारी, प्रतियां जलाकर किया जोरदार विरोध

सिरसा में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के खिलाफ भड़के बिजली कर्मचारी, प्रतियां जलाकर किया जोरदार विरोध

सिरसा, 31 अगस्त। बिजली कर्मचारियों ने गुरुग्राम एवं नूंह जिलों में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार को सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने इस दौरान आदेशों की प्रतियां भी जलाईं। सिरसा के ऐलनाबाद में विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी नेताओं ने मीडिया को पूरी जानकारी दी।

समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस के लिए दायर की गई है याचिका

कर्मचारी नेताओं ने बताया कि गुरुग्राम एवं नूंह राजस्व जिलों में इलेवन पॉवर प्रा. लि. गुरुग्राम द्वारा समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। यह याचिका हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दायर की गई है। इस पूरे मामले को लेकर बिजली कर्मचारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।

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कंपनी की पूंजी और अनुभव पर उठाए गए हैं बड़े सवाल

कर्मचारी नेताओं राजेश भाकर और हरिकिशन कंबोज ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी ने लगभग 4,717 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में करीब 1,415 करोड़ रुपये इक्विटी बताई गई है। जबकि हैरानी की बात यह है कि इस कंपनी की चुकता पूंजी मात्र एक करोड़ रुपये है। कंपनी के पास बिजली विभाग में काम करने का कोई भी अनुभव नहीं है। इसके बावजूद एचईआरसी की विशेषज्ञ समिति द्वारा कंपनी को लाइसेंस देने की सिफारिश कर दी गई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि समिति की इस रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।

क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर

गुरुग्राम क्षेत्र बिजली निगम के राजस्व में लगभग 40 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान देता है। यदि अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ता निजी क्षेत्र में चले जाते हैं तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। इसका सीधा और भारी भार ग्रामीण, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और कंपनी का गठन

कर्मचारियों ने प्रस्तावित पैरेलल लाइसेंस को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने, सभी संबंधित हितधारकों को अपनी बात रखने के लिए सुनवाई का अवसर देने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि इस कंपनी का गठन 6 जून 2025 को हुआ था। इस कंपनी ने तीन अन्य कंपनियों के साथ मिलकर गठबंधन किया है। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल गुरुग्राम और नूंह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के करोड़ों ग्रामीण, कृषि एवं घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा हुआ एक गंभीर मामला है।

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