सिरसा: खारे पानी में किसान ने तलाशा सुनहरा विकल्प, झींगा पालन से 65 लाख का कारोबार

सिरसा जिले के प्रगतिशील किसान गुरदीप सिंह ने खारे पानी को कमाई का जरिया बनाया है। उन्होंने अपनी मेहनत से लाखों रुपये का कारोबार खड़ा कर लिया है। उनका यह सफर 14 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ था। आज यह सफर बढ़कर 65 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच गया है। गांव रघुआना के किसान गुरदीप सिंह ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती को लेकर चुनौतियां कम नहीं थीं। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को समस्या मानकर रुकने के बजाय उनमें संभावना तलाशने की कोशिश की। इसी तलाश ने उन्हें खेत से तालाब तक और फसल से झींगा पालन तक पहुंचा दिया।
खेत से तालाब तक का सफर
आज गुरदीप सिंह की पहचान एक ऐसे प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है। उन्होंने खारे पानी वाली जमीन में व्हाइट श्रिंप पालन को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। गुरदीप सिंह ने बताया कि पारंपरिक खेती में खारे पानी और सिंचाई की समस्याओं के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। इसके बाद उन्होंने कृषि से जुड़े सेमिनारों, विशेषज्ञों और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए झींगा पालन की जानकारी जुटानी शुरू की। खारी जमीन में झींगा पालन की सफल कहानियों ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया और वहां से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
सरकारी योजनाओं का मिला लाभ
वर्ष 2019 में किसान गुरदीप सिंह ने झींगा पालन की शुरुआत की थी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपये की परियोजना लागत आई थी। इस लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए गए। इस परियोजना के लिए उन्हें सरकार की ओर से करीब 3.93 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इसके बाद प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और नए तालाब बनाए गए। इस व्यवसाय से अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। झींगा पालन का लाभ केवल गुरदीप सिंह तक ही सीमित नहीं रहा है। इस व्यवसाय से 10 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र के अन्य किसान भी अब झींगा पालन की संभावनाओं को गहराई से समझने लगे हैं।
चुनौतियों का सामना और भविष्य की राह
शुरुआत में गुरदीप सिंह के सामने कई तरह की मुश्किलें आईं। इसमें मुख्य रूप से बीमारी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव जैसी बड़ी चुनौतियां शामिल थीं। उन्होंने जैव सुरक्षा उपायों को अपनाया और पानी के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने प्रोबायोटिक्स के इस्तेमाल और अलग-अलग बिक्री चैनल विकसित करके इन सभी समस्याओं का डटकर सामना किया। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने इस पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सिरसा जैसे क्षेत्रों में जहां कुछ स्थानों पर खारे पानी के कारण पारंपरिक खेती बुरी तरह प्रभावित होती है, वहां वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन करना किसानों के लिए आय का एक बेहतर वैकल्पिक साधन बन सकता है। गुरदीप सिंह का यह उदाहरण सभी किसानों के लिए एक बड़ी सीख है। यह उदाहरण यह साफ दिखाता है कि सरकारी सहयोग के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन को अपनाकर किसान अपनी आय के नए और बेहतर स्रोत तैयार कर सकते हैं।