सिरसा: सफाई कर्मियों से टकराव नहीं समाधान का रास्ता निकाले सरकार, सांसद कुमारी सैलजा का बड़ा बयान

सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और शहरों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों से बातचीत और उनकी मांगों के समाधान की बात करती है, तो दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों और उनके नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है। सांसद ने सवाल उठाया कि आखिर यह कहां का इंसाफ है और सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान निकालना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने शनिवार को जारी एक प्रेस बयान में कहा कि प्रदेश के कई शहरों में करीब 17 दिन तक कूड़ा नहीं उठने से हालात बेहद गंभीर बन रहे हैं। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, दुर्गंध और गंदगी के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सरकार की यह पहली जिम्मेदारी थी कि वह समय रहते कर्मचारियों से संवाद करती और ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होने देती कि शहरों में हजारों टन कचरा जमा हो जाए।
सहमति वाली मांगों को समय पर लागू क्यों नहीं किया गया
सांसद ने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि कर्मचारी हड़ताल पर क्यों गए, बल्कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिन मांगों पर पहले सहमति बनी थी, उन्हें समय पर लागू क्यों नहीं किया गया। यदि सरकार ने कर्मचारियों के साथ किए गए वादों को पूरा किया होता और लिखित आदेश जारी कर दिए होते, तो शायद कर्मचारियों को हड़ताल जैसा कठोर कदम उठाने की नौबत ही नहीं आती।
प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में रहा नाकाम
कुमारी सैलजा ने कहा कि 17 दिनों तक आम जनता गंदगी और दुर्गंध से बेहद परेशान रही, लेकिन शासन और प्रशासन कोई भी प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं बना सका। अब कुछ चुनिंदा स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी में कचरा उठाया जा रहा है। कचरा उठना अति आवश्यक है और जनता को साफ-सफाई मिलनी ही चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी उतना ही जरूरी है कि कर्मचारियों की समस्याओं और जायज मांगों का समाधान किया जाए। केवल पुलिसबल के सहारे किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
सरकार की प्राथमिकता टकराव नहीं संवाद होनी चाहिए
सांसद सैलजा ने सरकार से जोर देकर मांग की कि कर्मचारियों के साथ सार्थक बातचीत की जाए और पहले से सहमत मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय लिया जाए। इसके अलावा, हिरासत में लिए गए कर्मचारी नेताओं के प्रति अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई से बचा जाए और प्रदेश के सभी शहरों में जमा कचरे को तत्काल उठवाकर सफाई व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य किया जाए। सरकार की पहली प्राथमिकता टकराव की बजाय संवाद, समाधान और जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा होनी चाहिए।