सिरसा: विभाजन की पीड़ा को याद कर सद्भाव और विकसित भारत का संकल्प लें युवा - कुलपति

चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा है कि प्रत्येक नागरिक और विशेषकर युवाओं के लिए अपने देश और उसके इतिहास को जानना बेहद जरूरी है। उन्होंने विभाजन की पीड़ा को याद करते हुए कहा कि अनेक परिवारों ने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोया था। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने पूर्वजों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए और ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति को मजबूत करना होगा। यह बात कुलपति ने सीडीएलयू में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इसके अलावा जिले के कई शिक्षण संस्थानों में भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
युवाओं की भूमिका और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत युवाओं का देश है और देश के भविष्य की दिशा एवं दशा तय करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी शक्ति और क्षमताओं को पहचानें। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि आज मोबाइल हमारे लिए दोस्त भी है और दुश्मन भी है, इसलिए इसका विवेकपूर्ण उपयोग करना बहुत आवश्यक है।
शिक्षाविद् राजकुमार ग्रोवर के विचार
शिक्षाविद् राजकुमार ग्रोवर ने कार्यक्रम में कहा कि हमें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह बचना होगा और समाज में समरसता को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज और देश को आगे ले जाना ही हमारी सच्ची अभिव्यक्ति है। युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाना और प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी मंजिल तक पहुंचाना शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को केवल अपनी डिग्री तक सीमित न रहकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, भारी पीड़ा और मानवीय त्रासदी को दर्शाने वाली विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को उस दौर की घटनाओं से पूरी तरह अवगत कराया गया।