सिरसा में आवास नवीनीकरण योजना में अनियमितता पर सरपंच सुभाष सिंह निलंबित

सिरसा जिले के नाथूसरी चौपटा खंड के गांव रंधावा के सरपंच सुभाष सिंह को डॉ. भीमराव अंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना में अनियमितताओं के मामले में उपायुक्त शांतनु शर्मा ने बुधवार को सस्पेंड कर दिया है। गांव के ही कुछ लोगों द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली अनुदान राशि को सरपंच द्वारा हड़प लिया गया है। इस मामले की जांच में यह सामने आया कि गांव की निवासी सीमा कंवर जो कि सुनील सिंह की पत्नी हैं और धर्मो देवी जो कि मदन सिंह की पत्नी हैं, उन दोनों को मकान की मरम्मत करवाने हेतु 80-80 हजार रुपए की अनुदान राशि स्वीकृत हुई थी। इन दोनों महिलाओं ने अपने बयानों में यह बात कही है कि यह सारी राशि उनके बैंक खाते में आने के ठीक अगले ही दिन सरपंच सुभाष सिंह के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा ली गई थी।
योजना के तहत पैसों की वसूली और जांच
इस मामले की शिकायत में यह भी बड़ा आरोप लगाया गया था कि मिट्टी गिरवाने के बहाने से लाभार्थियों से कुल 1 लाख 60 हजार रुपए नकद वसूले गए थे। जिला कल्याण अधिकारी सिरसा की कमेटी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में इन सभी आरोपों की प्रथम दृष्टया पूरी पुष्टि हो चुकी है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त कार्यालय द्वारा 15 जुलाई को सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उनसे सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया था। इसके जवाब में सरपंच सुभाष सिंह ने 23 जुलाई को खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताते हुए यह दावा किया था कि यह शिकायत उनके चुनावी विरोधी गुट की एक बड़ी साजिश है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह साजिश 2022 के पंचायत चुनाव में हार मिलने के बाद बदले की भावना से रची गई है।
जांच के तथ्य और सरपंच का पक्ष
जांच के दौरान यह मुख्य तथ्य भी उभरकर सामने आया कि जिस मकान की मरम्मत करवाने का दावा किया गया था, उस मौके पर वास्तव में केवल एक ही कमरा मौजूद मिला। इसके बावजूद मकान की पूरी अनुदान राशि महज एक दिन के भीतर ही सरपंच के निजी खाते में स्थानांतरित हो गई थी, जो कि इस योजना के दुरुपयोग की आशंका को और भी ज्यादा मजबूत करती है। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने आरटीआई के माध्यम से भी तमाम दस्तावेज हासिल कर लिए थे और इस मामले की दोबारा से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग उठाई थी। दूसरी तरफ सरपंच सुभाष सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। सरपंच का यह कहना है कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ अपील करेंगे और इसके लिए उनके पास एक महीने का पूरा समय मौजूद है।