सोनीपत में वंदे मातरम के अनादर पर कांग्रेस के खिलाफ भाजपा का कैंडल मार्च, सार्वजनिक माफी की मांग

सोनीपत में वंदे मातरम के अनादर पर कांग्रेस के खिलाफ भाजपा का कैंडल मार्च, सार्वजनिक माफी की मांग

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के अनादर के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेत्री सोनिया गांधी ने वन्दे मातरम गायन का अनादर किया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रत्येक भारतीय की भावना को ठेस पहुंची है और कांग्रेस नेताओं को इसके लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

रविवार देरसांय भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता के निर्देशानुसार सोनीपत जिला भाजपा द्वारा भाजपा नेताओं की अगुवाई में एक विरोध प्रदर्शन किया गया। यह कैंडल मार्च महात्मा गांधी चौक से शुरू होकर बाबा भीम राव अम्बेडकर चौक बस अड्डा तक निकाला गया। इस दौरान सभी कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम और राष्ट्रभक्ति के जोरदार नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रगीत के सम्मान तथा स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों की स्मृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पूरी तरह से व्यक्त की।

वंदे मातरम के सम्मान से कोई समझौता नहीं

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वरिष्ठ भाजपा नेता और सोनीपत नगर निगम मेयर राजीव जैन ने कहा कि जिस वंदे मातरम की प्रेरणा से स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था, उसी गीत के लिए असंख्य वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि उसके सम्मान को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती है। राष्ट्रगीत का सम्मान किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता संग्राम की महान विरासत से जुड़ा हुआ विषय है।

कांग्रेस नेतृत्व पर साधा गया निशाना

विधायक निखिल मदान ने कहा कि भाजपा राष्ट्र के सम्मान, राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और देश के वीर बलिदानियों की विरासत से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं होने देगी। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रभक्ति और देश के स्वाभिमान का एक अमर प्रतीक है। इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असंख्य देशभक्तों के दिलों में राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की बहुत बड़ी भावना जगाई थी। ऐसे महान राष्ट्रगीत के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर सीधे तौर पर देशवासियों की भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेत्री सोनिया गांधी जैसे शीर्ष नेताओं द्वारा खुद इसका अनादर करके अपनी कुंठित मानसिकता का खुलकर परिचय दिया गया है। कांग्रेस नेताओं को देश के सामने स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए और राष्ट्रगीत के सम्मान का अनादर करने पर देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा पर गंभीर सवाल

प्रदेश महामंत्री सत्यप्रकाश जरवाता ने कहा कि जो व्यक्ति या नेता हमारे देश के राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान की गरिमा को अच्छी तरह से नहीं समझ सकता है, वह देश और प्रदेश का भला कैसे कर सकता है। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान की अपनी एक निश्चित परंपरा होती है और उसी के तहत इसको गाया जाता है। जब कांग्रेस नेताओं को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत का मान-सम्मान करना तक नहीं आता है, तो वह देश की मान-मर्यादा, गरिमा और उसकी प्रतिष्ठा को कैसे बचाकर रख सकते हैं। यह बहुत ही असोभिनय और बहुत निंदनीय बात कांग्रेस के नेताओं द्वारा देखने को मिली है। अगर उनको राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गान का सही तरीका नहीं पता था, तो वह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं या नेताओं द्वारा दिए जा रहे राष्ट्रीय गीत के सम्मान को देखकर भी इसे आसानी से सीख सकते थे। यह पूरी हरकत यह बड़ी जानकारी देती है कि अभी इन्हें भारत देश की राष्ट्रीय गरिमा और गौरव की पूरी जानकारी नहीं है।

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