सोनीपत में प्राकृतिक खेती से घटेगी लागत और बढ़ेगी किसानों की आय: डॉ. परमिंदर

सोनीपत में प्राकृतिक खेती से घटेगी लागत और बढ़ेगी किसानों की आय: डॉ. परमिंदर

सोनीपत में 10 सितंबर को किसानों को रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र सोनीपत की ओर से ठरू गांव में एक किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की पूरी जानकारी दी गई। किसानों को जैविक संसाधनों के उपयोग और कम लागत में खेती करने के बारे की बातें भी बताई गईं।

किसानों को दी गई प्राकृतिक खेती की तकनीक की जानकारी

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र सोनीपत ने यह प्रशिक्षण आयोजित किया। यह आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जोधपुर के सहयोग से किया गया। कृषि विशेषज्ञ डॉ. परमिंदर ने कार्यक्रम में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का ही इस्तेमाल किया जाता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और जैव विविधता को बनाए रखने में बहुत मदद मिल सकती है। किसानों को प्राकृतिक खेती की व्यावहारिक तकनीकों और फसल प्रबंधन के बारे में भी पूरी जानकारी दी गई।

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गांव स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास

ठरू गांव की सरपंच सरोज बाला ने कार्यक्रम में कहा कि किसानों को ऐसे सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। गांव स्तर पर भी किसानों को प्राकृतिक खेती की नई तकनीकों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ पर्यावरण और किसानों की बेहतर आय के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। भाजपा सोनीपत जिला महामंत्री नीरज कुमार ठरू ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए टिकाऊ खेती का एक बेहतर विकल्प बन सकती है।

खेती की लागत कम करना है बेहद जरूरी

भाजपा सोनीपत किसान मोर्चा के नेता अजय भटाना ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती की लागत को कम करना बहुत जरूरी है। प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है। किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से इसका व्यावहारिक ज्ञान देना चाहिए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के तमाम किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

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