बाबैन के गुरुद्वारा मंडोखरा साहिब में श्रद्धा के साथ मनाया गया श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का प्रकाश पर्व

बाबैन में गुरुद्वारा मंडोखरा साहिब नौवीं पातशाही में आठवें गुरु, श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया है। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में विशेष धार्मिक समागम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत ने पहुंचकर गुरु चरणों में माथा टेका और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे गुरुद्वारा परिसर में गुरबाणी कीर्तन और गुरु साहिब के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
धार्मिक समागम के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज का प्रकाश कर विधिवत रूप से गुरबाणी कीर्तन, कथा-विचार एवं अरदास का आयोजन किया गया है। संगत ने गुरु साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर गुरबाणी का रसपान किया तथा गुरु घर की खुशियां प्राप्त कीं। हजूरी रागी भाई जगदीप सिंह जत्था सहित विभिन्न कीर्तन जत्थों ने मधुर गुरबाणी कीर्तन द्वारा संगत को नाम-सिमरन, गुरु इतिहास और गुरमत विचारधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है। कीर्तन की मधुर प्रस्तुतियों से पूरा गुरुद्वारा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरबाणी में लीन होकर गुरु साहिब का स्मरण करते दिखाई दिए।
गुरुद्वारा मंडोखरा साहिब के संचालक बाबा सुरेन्द्र सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा, दया, करुणा, सहनशीलता और त्याग का अनुपम उदाहरण है। गुरु साहिब ने छोटी आयु में ही मानवता की सेवा और परोपकार की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक जरूरतमंद की सेवा करने का संदेश दिया है।
समागम के समापन अवसर पर बाबा सुरेन्द्र सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष सरबत के भले की अरदास की है। अरदास में समूची मानवता के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से संगत के लिए विशेष गुरु का लंगर आयोजित किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर गुरु का प्रसाद ग्रहण किया। भीषण गर्मी को देखते हुए गुरुद्वारा परिसर में छबील सेवा भी निरंतर जारी रही जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं और राहगीरों को शीतल मीठा जल वितरित किया गया।