रादौर में संपन्न हुई श्रीरामचरितमानस कथा, सुधीर शरण महाराज ने बताई भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता

वर्तमान समय में रामचरितमानस की शिक्षाएं पहले से अधिक प्रासंगिक - सुधीर शरण महाराज
रादौर, 8 सितंबर कुलदीप सैनी
रादौर के प्राचीन शिव मंदिर अंधेरिया बाग में चल रही श्रीरामचरितमानस कथा का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया। यह आयोजन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव के उपलक्ष्य में महंत यमुनागिरी शास्त्री की अगुवाई में किया जा रहा था। इस धार्मिक आयोजन के दौरान अंतिम दिन कथा वाचक सुधीर शरण महाराज ने बहुत ही सुंदर प्रसंग सुनाए। कथा के अंतिम दिन सुधीर शरण महाराज ने श्रीराम के अयोध्या लौटने, भरत से मिलन और श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाया। इन प्रसंगों को सुनकर वहां उपस्थित सभी श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पूरा मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
समाजसेवी का सम्मान और हवन-भंडारे का आयोजन
कथा व्यास सुधीर शरण महाराज ने कथा में अपनी सेवाएं देने पर समाजसेवी सतीश गोयल को सम्मानित किया। समापन के इस पावन अवसर पर मंदिर में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस भंडारे में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। सभी ने इस धार्मिक अनुष्ठान में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
रामचरितमानस की शिक्षाएं और उपस्थित गणमान्य लोग
कथावाचक सुधीर शरण महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में रामचरितमानस की शिक्षाएं पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। यदि व्यक्ति भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं तो समाज में आपसी सद्भाव, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बच्चों को भी धार्मिक एवं संस्कारयुक्त शिक्षा दें। इस धार्मिक अवसर पर कुलदीप वशिष्ठ, आचार्य इंदु शेखर, एनके शर्मा, प्रवीन अग्रवाल, सतीश गोयल, तेजपाल सैनी, विरेंद्र अरोड़ा, सतीश अग्रवाल, राकेश शर्मा, उमेश सैनी, रामू शाहू, राजेश शास्त्री, हरिकृष्ण सैनी, विपिन वर्मा इत्यादि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।