कर्मचारियों की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी से नहीं थमेगी हड़ताल, सुभाष लांबा ने सरकार से की मांग

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने पालिकाओं और अग्निशमन विभाग के आंदोलनरत कर्मचारियों के नेताओं की बर्खास्तगी, निलंबन और हड़ताली कर्मचारियों की गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। 13 मई को सरकार और नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के बीच हुए समझौते को लागू करने तथा मानी गई मांगों के पत्र जारी कर हड़ताल समाप्त करवाने की मांग की गई है।
हड़ताल और मांगों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप
शहरी स्थानीय निकाय और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं। 13 मई को शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनी थी। सरकार को अब इन मांगों को लागू करने के आदेश जारी करने चाहिए। लेकिन इसके बजाय आंदोलन को दबाने के लिए बर्खास्तगी, निलंबन और गिरफ्तारियों का रास्ता अपनाया जा रहा है। सरकार 13 में से 12 मांगें मानने का दावा कर आंदोलन के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।
नियमितीकरण और कानूनी अड़चनों पर लांबा का स्पष्टीकरण
ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग पर सरकार के कानूनी और तकनीकी अड़चन के तर्क को खारिज कर दिया गया है। विधानसभा में कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी स्वयं कह चुके हैं कि यदि 2001 के बाद किसी राज्य ने दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने की नीति बनाई है तो सरकार भी ऐसी नीति बनाने को तैयार है। हरियाणा में 16 और 18 मई 2014 को तीन वर्ष की सेवा के आधार पर नियमितीकरण की नीतियां बनाई गई थीं। इन नीतियों के तहत करीब पांच हजार कर्मचारी पक्के किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अन्य राज्यों का उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को इन नीतियों को वैध माना है। हिमाचल प्रदेश ने भी दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति 1 अप्रैल 2026 से लागू की है। कर्मचारियों का आंदोलन लगातार जारी है और सरकार से तुरंत पत्र जारी करने की मांग की जा रही है।