हिसार में वेद प्रचार सप्ताह का शुभारंभ: स्वामी आर्यवेश ने कहा कि ईश्वर निराकार और सर्वव्यापक है, उसे शरीरधारी बताना वेद सम्मत नहीं

हिसार में वेद प्रचार सप्ताह का शुभारंभ: स्वामी आर्यवेश ने कहा कि ईश्वर निराकार और सर्वव्यापक है, उसे शरीरधारी बताना वेद सम्मत नहीं

हिसार के आर्य समाज नागोरी गेट लाजपतराय चौक में सोमवार को वेद प्रचार सप्ताह का भव्य शुभारंभ यज्ञ-हवन के साथ किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति दी और अपने जीवन में वैदिक विचारों को अपनाने का पूरी तरह से संकल्प लिया। इस विशेष अवसर पर दिल्ली से विशेष रूप से पहुंचे सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने वेद प्रवचन किए। उन्होंने अपने प्रवचनों के दौरान ईश्वर के वास्तविक स्वरूप की बहुत ही तार्किक व्याख्या की।

इस पवित्र यज्ञ के दौरान डॉ. सुरेंद्र बहल व सुनीता बहल, मांगेराम आर्य व दर्शना आर्या यजमान रहे। इसके अलावा दिलबाग आर्य व सुनीता आर्या तथा सनी आर्य व गीता आर्या ने भी यज्ञ में यजमान के रूप में अपनी भूमिका निभाई। यज्ञ में ब्रह्मा के रूप में कर्मबीर शास्त्री ने अपनी मुख्य भूमिका निभाई और वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

स्वामी आर्यवेश ने की ईश्वर के स्वरूप की तार्किक व्याख्या

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वेद प्रवचन की शुरुआत करते हुए स्वामी आर्यवेश ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेदों के अनुसार ईश्वर पूरी तरह से निराकार और सर्वव्यापक है। उन्होंने ब्रह्मांड की विशालता और प्रकृति की अद्भुत संरचना का उदाहरण देते हुए सभी को समझाया। उन्होंने कहा कि इतनी विराट और सुव्यवस्थित सृष्टि किसी भी शरीरधारी मनुष्य द्वारा बनाई नहीं जा सकती है। उन्होंने सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि इस पूरी सृष्टि की रचना के पीछे किसी सर्वोच्च शक्ति का होना बहुत आवश्यक है।

धर्म के नाम पर फैलने वाली अंधश्रद्धा से बचने का आह्वान

स्वामी आर्यवेश ने ईश्वर के गुणों की तार्किक व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की अंधश्रद्धा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ शरीरधारी लोग स्वयं को परमात्मा घोषित कर देते हैं और भोली-भाली जनता की आस्था का गलत लाभ उठाते हैं तथा विलासितापूर्ण जीवन जीते हैं। उन्होंने जनता से ऐसे सभी आडंबरों से दूर रहने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने वेदों में वर्णित ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को गहराई से समझने की बात कही।

वैदिक भजनों और बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस अवसर पर आर्य जगत की सुप्रसिद्ध भजनोपदेशिका विदुषी संगीता आर्या ने सहारनपुर से आकर वैदिक भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी इन प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं को वैदिक विचारों से जोड़ा। कार्यक्रम में उनके ओजस्वी भजनों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के आयोजकों ने सभी को जानकारी दी कि स्वामी आर्यवेश के इन वेद प्रवचनों की यह पूरी श्रृंखला आगामी 6 सितंबर, रविवार तक लगातार जारी रहेगी। इस दौरान वेद, ईश्वर, धर्म और वैदिक जीवन पद्धति से जुड़े हुए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष प्रवचन दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम में स्थानीय साधु-संतों, आचार्यों और विद्वानों के अलावा गुरुकुल धीरणवास, जगन्नाथ आर्य कन्या पाठशाला तथा सीएवी स्कूल के विद्यार्थियों और अध्यापक-अध्यापिकाओं ने भी बहुत उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान देवेंद्र सिंह सैनी, उप प्रधान दलबीर आर्य, महामंत्री नरेंद्र मिगलानी, शमशेर सिंह आर्य नंबरदार, सत्यप्रकाश गोयल, सूबे सिंह आर्य मुकलान, आचार्य मान सिंह पाठक, संरक्षक नंदलाल चोपड़ा, जगतपाल शास्त्री, हरि सिंह एमसी, श्याम सुंदर और कुलदीप ग्रोवर सहित अनेक गणमान्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच का कुशल संचालन आचार्य प्रमोद योगार्थी द्वारा किया गया। यह पूरी जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से राजेश्वर द्वारा दी गई है।

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