तरावड़ी में श्री महाकाली महाकालेश्वर सिद्धपीठ मंदिर वार्ड नंबर-6 में आयोजित सातवीं श्री ब्रह्मपुराण कथा महोत्सव के चौथे दिन भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भगवान शिव एवं माता महाकाली के दर्शन किए और कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान बाल व्यास ऋषभ देव जी ने भगवान शिव के आदर्श जीवन, दांपत्य मर्यादा, परिवार की महत्ता और सनातन संस्कृति के मूल्यों का भावपूर्ण वर्णन किया। शिव विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर पूरा पंडाल हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा।
कथाव्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि
आज समाज में बढ़ते तलाक (डाइवोर्स) और फैलती फूहड़ता चिंता का विषय हैं। जब परिवारों में संस्कार, आपसी सम्मान, धैर्य और धार्मिक शिक्षा कमजोर पड़ती है, तब रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगती हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती का जीवन दांपत्य, समर्पण, त्याग और विश्वास का सर्वोत्तम उदाहरण है।
कार्यक्रम के दौरान पंडित आचार्य शुभम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को बताया कि
श्री ब्रह्मपुराण कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जा रही है तथा प्रतिदिन कथा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव एवं माता महाकाली की आरती में भाग लिया। इस अवसर पर मोहित गुप्ता, नरेश अरोड़ा, यश सलूजा, वीरेंद्र बंसल, हंसराज पाहुजा, श्याम सुन्दर सहगल, बलदेव गिरधर, रमेश शर्मा पड़वाला, शुभम शर्मा, मौलिक समेत काफी श्रद्धालू मौजूद रहे।