तरावड़ी में महिलाओं ने की तीज पर्व पर विशेष चर्चा, कहा- आधुनिकता के दौर में जड़ों और संस्कृति को भूलना चिंता का विषय

तरावड़ी: आधुनिकता की तेज रफ्तार और बदलती जीवनशैली के बीच भारतीय संस्कृति से जुड़े पारंपरिक त्योहारों का स्वरूप भी लगातार बदलता जा रहा है। कभी तीज का त्योहार महिलाओं के लिए उत्साह, उमंग, सुहाग, लोकगीतों, झूलों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा विशेष पर्व हुआ करता था, लेकिन आज इसकी रौनक कई जगहों पर केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित होती दिखाई दे रही है। तीज के बदलते स्वरूप और इसके सांस्कृतिक महत्व को लेकर महिलाओं से विशेष परिचर्चा की गई। इस दौरान महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि तीज जैसे त्योहार केवल मनोरंजन के अवसर नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।
त्योहारों का बदलता स्वरूप और सांस्कृतिक महत्व
हल्के के विधायक भगवानदास कबीरपंथी की धर्मपत्नी सविता कबीरपंथी, के.एस. ओवरसीज प्रा.लि. तरावड़ी की सी.एम.डी. ममता गोयल व जी.वी. राईस यूनिट की सी.एम.डी. सुमन बंसल ने कहा कि आज के दौर में कई त्योहार सोशल मीडिया पोस्ट, फोटो सेशन और औपचारिक कार्यक्रमों तक सिमटते जा रहे हैं। तीज का असली उत्साह तभी कायम रह सकता है, जब इसमें पारंपरिक गीत-संगीत, झूले, मेहंदी, लोक परंपराएं, पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक मान्यताओं को उचित स्थान दिया जाए। महिलाओं का कहना था कि आधुनिकता अपनाना गलत नहीं है, लेकिन आधुनिकता के नाम पर अपनी जड़ों और संस्कृति को भूल जाना चिंता का विषय है।
नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ना जरूरी
श्री हंस राईस मिल्स की सी.एम.डी. रजनी गुप्ता, भाजपा नेत्री मीना चौहान एवं संयोगिता गुप्ता ने कहा कि तीज का त्योहार महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व रखता है। इसे केवल एक दिन की औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर मनाया जाना चाहिए। नई पीढ़ी को भी तीज के धार्मिक और सामाजिक महत्व के बारे में बताया जाना जरूरी है। गर्ग राईस इंडस्ट्रीज की सी.एम.डी. संतोष गुप्ता, न्यू कैम ऑयल प्रा.लि. से मीनू तॉयल, एस.एस. राईस यूनिट से सुनैना हंस एवं श्री राम एग्रोटेक की सीएमडी सुनीता सिंगला ने कहा कि आज बच्चों और युवाओं को आधुनिक जीवनशैली अधिक आकर्षित करती है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें अपने पारंपरिक त्योहारों से जोड़ें। तीज जैसे पर्व हमारी विरासत हैं, जिन्हें आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।
पारंपरिक तरीके से तीज मनाने की अपील
भाजपा नेत्री सोनम कबीरपंथी, डबल चाबी बासमती राईस की डायरेक्टर प्रेक्षा गोयल एवं श्रीराम राईस यूनिट की डायरेक्टर पलक सिंगला ने कहा कि आज कई बार त्योहार सिर्फ कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित रह जाते हैं। तीज की वास्तविक खुशी तभी है जब महिलाएं मिलकर पारंपरिक तरीके से इसे मनाएं, लोकगीत गाएं, झूले झूलें और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटें। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी डा. कशिश सलूजा, जी.वी. राईस यूनिट से चारू बंसल एवं ज्योति बंसल ने कहा कि समय के साथ बदलाव होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम अपनी जड़ों को भूल जाएं। आधुनिक तरीके से तीज मनाने में कोई बुराई नहीं, लेकिन इसके पीछे छिपी धार्मिक और सांस्कृतिक भावना भी बरकरार रहनी चाहिए।
धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान
कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी संगीता गुप्ता, समाजसेविका भावना मिड्डा, ब्रेन जिम तरावड़ी की डायरेक्टर रेनू गुप्ता एवं शिक्षिका सविता जांगड़ा ने कहा कि तीज केवल महिलाओं का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति का हिस्सा है। पारंपरिक गीत, झूले, मेहंदी और आपसी मेल-जोल इस पर्व की पहचान रहे हैं। इन परंपराओं को जीवित रखने की जरूरत है। सभी महिलाओं ने मिलकर कहा कि हमारे त्योहार किसी न किसी धार्मिक और आध्यात्मिक भावना से जुड़े हुए हैं। इसलिए तीज मनाते समय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इससे त्योहार का महत्व और बढ़ जाता है।