तरावड़ी में भारत विकास परिषद की महिला विंग का विशेष कार्यक्रम, संस्कृति की जड़ों से दूर होती नई पीढ़ी पर जताई चिंता

तरावड़ी में भारत विकास परिषद की महिला विंग का विशेष कार्यक्रम, संस्कृति की जड़ों से दूर होती नई पीढ़ी पर जताई चिंता

संस्कृति की जड़ों से दूर होती नई पीढ़ी गहरी चिंता का विषय है। तरावड़ी में भारत विकास परिषद शाखा तरावड़ी की महिला विंग की ओर से मयूर होटल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं संस्कारों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। महिला सदस्यों ने आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी के भारतीय संस्कारों और संस्कृति से दूर होने पर चिंता व्यक्त की। महिला सदस्यों ने कहा कि भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

भारतीय संस्कृति और संस्कारों का महत्व

भारतीय संस्कृति केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है। इसमें परिवार, समाज, संस्कार, सेवा, सम्मान और आपसी भाईचारे की मजबूत भावना निहित है। आज की आधुनिक जीवनशैली में व्यस्तता बढ़ने के कारण कहीं न कहीं हमारी युवा पीढ़ी पारंपरिक संस्कारों और रीति-रिवाजों से दूर होती जा रही है। शाखा की महिला विंग की अध्यक्ष अंजू बंसल ने कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने आह्वान किया कि सभी त्योहारों और धार्मिक पर्वों को अपनी पारंपरिक संस्कृति एवं रीति-रिवाजों के अनुसार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाए। ऐसा करने से बच्चों और युवाओं को भारतीय परंपराओं का महत्व समझाया जा सकता है।

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आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन

आधुनिकता को अपनाना गलत नहीं है, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूल जाना उचित नहीं है। अंजू बंसल ने कहा कि परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला है। यदि माता-पिता और परिवार के बड़े स्वयं भारतीय परंपराओं, त्योहारों और संस्कारों को जीवन में अपनाएंगे, तो नई पीढ़ी भी उनसे प्रेरणा लेकर अपनी संस्कृति से जुड़ी रहेगी। संस्कारों से जुड़ी पीढ़ी ही समाज और देश को मजबूत दिशा दे सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित महिला सदस्यों ने भी भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। महिलाओं ने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों की पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य महिलाएं

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने आपसी विचार-विमर्श करते हुए समाज में महिलाओं की भूमिका पर बात की। उन्होंने परिवार में संस्कारों के महत्व तथा बच्चों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने को लेकर भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर महिला संयोजिका अंजू बंसल, शिप्रा मित्तल, सीमा सिंगला, शिल्पा सिंगला, नीतू गर्ग, किरण बंसल, शमा बंसल, काजल गोयल, सुनैना हंस, अंजलि कामरा, अनु जैन, भावना मिड्ढा, डॉ. कविता, किरण बंसल, निशा गुप्ता, पी.के. भारद्वाज, पिंकी गोयल, पूजा बंसल, प्रीति गुप्ता, रश्मी गर्ग, रेनू बंसल, रेणुका आश्री, रिया गर्ग, शमा बंसल, शशि सिंगला, शिल्पा गर्ग, शिल्पी सिंगला, नेहा गर्ग, पिंकी रहेजा, अंजू मुंजाल, सीमा अरोड़ा, शालू गर्ग, सुनीता अग्रवाल, रेनू चौधरी, शिखा बंसल, ममता मुंजाल, प्रीति चौधरी, अंजू तगेजा, सीमा सिंगला, नेहा बंसल और प्रीति मित्तल समेत कई महिलाएं मौजूद रही।

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