तरावड़ी में श्रीमद्भागवत कथा: घर ही बच्चे की पहली पाठशाला और माता-पिता पहले गुरु हैं - अनिरुद्धाचार्य महाराज

तरावड़ी में श्रीमद्भागवत कथा: घर ही बच्चे की पहली पाठशाला और माता-पिता पहले गुरु हैं - अनिरुद्धाचार्य महाराज

तरावड़ी की नई अनाज मंडी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शिव शक्ति इंटर ग्लोब एक्सपोर्ट प्रा.लि. तरावड़ी की ओर से इस विश्व विख्यात कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब देखने को मिला। पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से कथा का वाचन किया जा रहा है।

महाराज जी ने भगवान की दिव्य लीलाओं एवं श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेशों का सरल एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने जीवन को धर्ममय और संस्कारयुक्त बनाने का संदेश दिया। हल्के के विधायक भगवानदास कबीरपंथी समेत कई दिग्गज नेताओं ने कथा में हिस्सा लिया और आरती उतारी।

गृहस्थ जीवन का महत्व और संस्कार

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

तृतीय दिवस की कथा में महाराज जी ने विशेष रूप से गृहस्थ जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम केवल सांसारिक जीवन जीने का माध्यम नहीं है। यह धर्म, सेवा, त्याग, प्रेम और जिम्मेदारियों का पालन करने का महत्वपूर्ण आश्रम है। परिवार में आपसी प्रेम, सम्मान और विश्वास बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन की पहचान है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवारों को मजबूत बनाने के लिए संस्कारों को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें माता-पिता का सम्मान, गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सनातन संस्कृति, धर्म और सेवा के संस्कार भी दिए जाने चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि घर ही बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता उसके प्रथम गुरु हैं।

परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य

यदि परिवार में प्रतिदिन भगवान का स्मरण, सत्संग, सदाचार और अच्छे संस्कारों का वातावरण रहेगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। कथा के दौरान महाराज जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने व्यस्त जीवन में परिवार के लिए समय निकालें। बच्चों के साथ संवाद करें और घर में प्रेम एवं धार्मिक वातावरण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने परिवार, समाज और कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी से व्यवहार करना भी धर्म का ही एक स्वरूप है।

कथा के दौरान भजनों एवं भगवान की लीलाओं के प्रसंगों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। पूरे कथा पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना हुआ था। श्रद्धालुओं ने महाराज जी के श्रीमुख से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं जीवनोपयोगी संदेश प्राप्त किया। श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस का समापन श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के जयकारों एवं मंगल आरती के साथ हुआ। कथा आयोजन को लेकर तरावड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस श्रीमद्भागवत कथा में अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें विधायक भगवानदास कबीरपंथी, नगरपालिका चेयरमैन वीरेंद्र बंसल, रमेश गुप्ता, अनुज गुप्ता, अमन गुप्ता, नाथीराम गुप्ता, राकेश गुप्ता, पंकज गुप्ता, संजय गुप्ता, नरेश गुप्ता, नरेश बंसल, प्रमोद बंसल, कृष्ण चंद सिंगला, गौरव दिल्ली, आशीष दिल्ली, योगेश सहारनपुर, संजय यमुनानगर, संदीप मेरठ, अनुज गाजियाबाद, संतोष गुप्ता, शालू दिल्ली, शिखा गुप्ता, दीप्ती दिल्ली, मीनू, श्रुति सहारनपुर, रीना गाजियाबाद, अनिल गुप्ता, राजकुमार तायल, राहुल गुप्ता, तिलक राज मक्कड़, शीशपाल गुप्ता, राकेश गर्ग, मदन लाल सचदेवा, विनीत बंसल, रोशन लाल गुप्ता, रणदीप चौधरी, राजीव नारंग, राधेश्याम गर्ग, यश सलूजा, अमित रहेजा, विजय गोयल, नरेश गर्ग तथा मंडी प्रधान सुभाष गुप्ता शामिल रहे।

Share:

Comments

Leave a comment