जींद में अध्यापक दिवस पर शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी, टेट अनिवार्यता और पुरानी पेंशन का किया विरोध

जींद में अध्यापक दिवस पर शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी, टेट अनिवार्यता और पुरानी पेंशन का किया विरोध

जींद जिले में 05 सितंबर को अध्यापक दिवस के अवसर पर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य किए जाने के विरोध में काली पट्टी बांधकर काम किया और अध्यापक दिवस मनाया। अध्यापकों का मुख्य कहना यह था कि उनके इतने लंबे अनुभव को सम्मान नहीं दिया जा रहा है और उन्हें जबरन टेट परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। अध्यापकों के अनुसार यह बिल्कुल भी सही नहीं है और सरकार को इस निर्णय को तुरंत प्रभाव से वापस लेना चाहिए।

जींद जिले के प्राथमिक शिक्षकों ने दर्ज कराया विरोध

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान जितेंद्र बैनीवाल और महासचिव अश्वनी नैन ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य किए जाने के विरोध में शनिवार को अध्यापक दिवस के पावन अवसर पर जींद जिले के सभी प्राथमिक शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। शिक्षकों का दर्द यह है कि एक तरफ तो सरकार इस विशेष दिन पूरे देश भर में शिक्षकों को बड़े स्तर पर सम्मानित करती है, वहीं दूसरी तरफ 20 से 30 साल तक की लंबी सर्विस पूरी कर चुके अध्यापकों के अनुभव को कोई सम्मान नहीं दिया जा रहा है। इसके विपरीत उन्हें टेट परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

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सांसद और विधायक की पेंशन बनाम कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा

राज्य वाइस चेयरमैन रूपेंद्र गोयत और जिला कोषाध्यक्ष अभिमन्यु रेढू ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि हमारे देश में सांसद और विधायक बनने पर तो पेंशन की बहुत अच्छी व्यवस्था की जाती है, जबकि सरकारी कर्मचारियों को 30 से 35 साल की लंबी सर्विस पूरी करने के बाद भी पेंशन के नाम पर केवल नाम मात्र की ही पेंशन दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सेवानिवृत्ति यानी रिटायरमेंट के बाद केवल पेंशन ही कर्मचारी का एकमात्र सहारा होती है, जिसे देने में भी आज सरकार लगातार कतरा रही है। जबकि एक कर्मचारी अपने जीवन के महत्वपूर्ण 25 से 30 साल सरकारी सेवाओं के माध्यम से पूरी ईमानदारी के साथ सरकार को समर्पित करता है।

पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने की उठी मांग

कर्मचारियों का साफ तौर पर यह मानना है कि पुरानी पेंशन स्कीम ही कर्मचारी के बुढ़ापे का एकमात्र सच्चा सहारा होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ केंद्र सरकार से यह पुरजोर मांग करता है कि एक विशेष विधेयक पारित किया जाए। इस विधेयक के माध्यम से शिक्षकों को टेट परीक्षा से पूरी तरह छूट प्रदान की जाए और देश के सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए ताकि बुढ़ापे में किसी भी कर्मचारी को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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