तोशाम में जन्माष्टमी की धूम: दुल्हन की तरह सजे मंदिर, झांकियों ने मोहा भक्तों का मन

तोशाम के विभिन्न मंदिरों में जन्माष्टमी का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। मंदिर संचालक समितियों ने कान्हा के जन्मोत्सव की खुशी में मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया है। मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को दर्शाने वाली अनेक झांकियां भी सजाई गईं, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं।
- मंदिरों की भव्य सजावट: तोशाम के विभिन्न मंदिर रंग-बिरंगी लड़ियों और लाइटों से सजाए गए।
- भजनों की गूंज: मंदिर परिसर 'नन्द घर आनंद भए, जय कन्हैया लाल की' जैसे भजनों और जयकारों से गूंज उठे।
- विशेष झांकियां: भगवान कृष्ण की जीवन लीलाओं पर आधारित झांकियां प्रदर्शित की गईं।
- जन्मोत्सव का समय: अर्धरात्रि 12 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म के साथ आरती और भोग लगाया गया।
तोशाम के इन मंदिरों में रही रौनक
जन्माष्टमी के अवसर पर तोशाम के संकटमोचन मेहंदीपुर बालाजी दरबार, प्राचीन दुर्गा माता मंदिर, पहाड़ी पर स्थित बाबा मुंगीपा मंदिर, प्राचीन खाटू श्याम मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर और प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तोशाम केंद्र सहित कई अन्य मंदिरों में विशेष सजावट की गई। इन मंदिरों में रंग-बिरंगी लाइटों और रंगीन लड़ियों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर में श्री कृष्ण की जीवन लीलाओं से संबंधित झांकियां सजाई गईं, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
महंत रामकिशन महाराज ने बताई जन्माष्टमी की महिमा
दक्षिणमुखी संकटमोचन मेहंदीपुर बालाजी दरबार के महंत पंडित रामकिशन महाराज गोवर्धन-मथुरा वाले ने जन्माष्टमी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कान्हा का जन्म 5253 साल पहले भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि के दौरान हुआ था। उन्होंने बताया कि तब से लेकर आज तक इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार भगवान श्री कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। अर्धरात्रि 12 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म के साथ आरती और भोग लगाया गया। इसके बाद भक्तों को धनिया, गोला और पंचामृत का प्रसाद वितरित किया गया।