तोशाम के असिस्टेंट प्रोफेसर जयपाल शास्त्री को मिला श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार

तोशाम के असिस्टेंट प्रोफेसर जयपाल शास्त्री को मिला श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार

तोशाम के महिला महाविद्यालय के संस्कृत असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शिक्षाविद् जयपाल शास्त्री को श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से नवाजा

तोशाम के चौधरी बंसीलाल राजकीय महिला महाविद्यालय में कार्यरत संस्कृत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर जयपाल शास्त्री को श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें 29वें राष्ट्रीय शिक्षक दिवस महोत्सव एवं सम्मान समारोह में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पुरस्कार 2026 के रूप में दिया गया है। यह सम्मान उन्हें नेताजी सुभाष चन्द्र बोस युवा जागृति सेवा समिति संस्था द्वारा शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण जागरुकता तथा समाज व राष्ट्रहित में विशेष सहयोग करने के लिए दिया गया है।

27 वर्षों से समाज के उत्थान के लिए कर रहे हैं कार्य

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शास्त्री ने बताया कि वे समाज के उत्थान व प्रगति हेतु 27 वर्षों से निरन्तर कार्य कर रहे हैं। वे प्रतियोगिता परीक्षाओं में विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं तथा उनका मार्गदर्शन करते हैं। डॉ. जयपाल शास्त्री सामाजिक कार्यों में निरन्तर लगे रहते हैं तथा प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थियों को पढ़ने हेतु प्रेरित करते रहते हैं। उनकी इन उपलब्धियों को देखते हुए विभिन्न संस्थाओं ने इन्हें श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से नवाजा है।

समारोह में अतिथि और गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह का सान्निध्य रहा। इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष शंकर धूपड तथा विशिष्टातिथि के रूप में डॉ. लक्ष्मण गॉड उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता एडवोकेट शिवरतन गुप्ता व प्रसिद्ध समाज सेवी पवन कुमार बुवानी वाला द्वारा की गई। इस कार्यक्रम में पूरे भारत से 100 से भी अधिक शिक्षकों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया।

सांसद और अध्यक्ष के विचार

इस अवसर पर सांसद धर्मबीर सिंह ने शिक्षकों के त्याग समर्पण के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की संरचना उस देश के शिक्षाविद शिक्षकों के माध्यम से की जा सकती है। कार्यक्रम के अध्यक्ष एडवोकेट शिवरतन गुप्ता ने शिक्षकों को विद्यार्थियों को संवारने वाला कहा। उनका कहना था कि जिस देश में शिक्षकों का सम्मान होता है वहां कभी भी किसी प्रकार की उच्छृंखलता नहीं हो सकती।

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