तोशाम में संस्कृत सम्भाषण शिविर का शुभारम्भ और रोडवेज कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ दो घंटे का विरोध प्रदर्शन

तोशाम में विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए संस्कृत सम्भाषण शिविर का शुभारम्भ किया गया है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि पैदा करना और दैनिक जीवन में संस्कृत संवाद की क्षमता विकसित करना है। इसके साथ ही निजीकरण के खिलाफ रोडवेज कर्मियों ने दो घंटे का विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार से प्राइवेट परमिट और प्राइवेट इलेक्ट्रिक बसें चलाने के फैसले को रद्द करने की मांग की है।
तोशाम में संस्कृत सम्भाषण शिविर का भव्य शुभारम्भ
तोशाम में संस्कृत सम्भाषण शिविर का शुभारम्भ शुक्रवार को किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सुमन रानी संस्कृत प्रवक्ता केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज, जो भारतीय संस्कृति एवं भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय हैं, उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई। संस्कृत भारती विस्तारक नीरज कुमार ने प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया। यह कार्यक्रम राजीव गांधी राजकीय महिला महाविद्यालय भिवानी के प्राचार्य डॉ. त्रिलोक चन्द की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। प्राचार्य ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा ही नहीं, अपितु भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परम्परा की समृद्ध वाहिका है।
प्राचार्य ने बताया कि संस्कृत केवल कर्मकाण्ड की भाषा न होकर जन साधारण की भाषा रही है। इसी के माध्यम से हम अपना और समाज का नैतिक मूल्य संवर्धित कर सकते हैं। प्राचार्य ने राजा भोज का उदाहरण भी दिया जिसमें एक बार वॉक भी शुद्ध संस्कृत जानता था। शिविर के दौरान छात्राओं को संस्कृत में दैनिक जीवन के सामान्य वाक्य, अभिवादन, स्वयं का परिचय, प्रश्नोत्तर, संवाद तथा व्यावहारिक शब्दावली का अभ्यास कराया जाएगा। शिविर में संस्कृत को केवल पढ़ने के स्थान पर बोलने, सुनने और समझने पर विशेष बल दिया जाएगा। विभिन्न गतिविधियों, संवाद-अभ्यास एवं रोचक अभ्यासों के माध्यम से छात्राओं में संस्कृत बोलने का आत्मविश्वास विकसित किया जाएगा।
संस्कृत भारती प्रान्त गीता शिक्षण प्रमुख भिवानी में संचालित तेरह शिविरों के संयोजक डॉ. जयपाल शास्त्री ने बताया कि इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के मन से संस्कृत को कठिन भाषा समझने की धारणा को दूर करना है। साथ ही उन्हें यह अनुभव कराना है कि संस्कृत भाषा सरल एवं सरस है और संस्कृत हमारी संस्कृति से जुड़ी है। महाविद्यालय में कार्यरत डॉ. लक्ष्मी संस्कृत प्रवक्ता इस पूरे शिविर की सम्पूर्ण व्यवस्था का निर्वहण करेंगी। उन्होंने बताया कि इस शिविर से हमारे महाविद्यालय की छात्राओं का बौद्धिक विकास होगा तथा संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ेगी। कार्यक्रम के अन्त में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्राओं का डॉ. लक्ष्मी द्वारा आभार व्यक्त किया गया। शिविर के शुभारम्भ से विद्यार्थियों में विशेष उत्साह एवं उमंग देखने को मिली और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. ईशा चौधरी, डॉ. परमानन्द, डॉ. सविता गौड़ आदि की अहम भूमिका रही।
निजीकरण के खिलाफ रोडवेजकर्मियों का दो घंटे का विरोध प्रदर्शन
निजीकरण के खिलाफ रोडवेजकर्मी शुक्रवार को तोशाम में करीबन 2 घंटे विरोध प्रदर्शन करेंगे। निजीकरण के चलते गुस्साए रोडवेजकर्मियों ने गुरुवार को फैसला किया कि सरकार या तो रोडवेज के बेड़े में बसें बढ़ाए और प्राइवेट बसों के परमिट कम करे जिससे रोडवेज का निजीकरण न हो सके। अन्यथा उन्हें बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसी के चलते रोडवेजकर्मियों ने शुक्रवार 4 सितंबर को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक 2 घंटे विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन सम्बन्ध सर्व कर्मचारी संघ राज्य स्तरीय आपातकाल मीटिंग फरीदाबाद में राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसका संचालन राज्य महासचिव सुमेर सिवाच ने किया। नेताओं ने आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि परिवहन मंत्री से 16 जून 2026 को वार्ता में परिवहन मंत्री ने स्वयं घोषणा की थी कि रोडवेज के बेड़े में 500 बसें और खरीदी जाएंगी और कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा मीटिंग करने का आश्वासन दिया था। परंतु अचानक सरकार को क्या हो गया कि हरियाणा में रोडवेज बेड़े में सरकारी बसें ना बढ़ाकर प्राइवेट परमिट देने शुरू कर दिए हैं।
इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है और नेताओं ने सरकार से मांग की कि प्राइवेट परमिट व प्राइवेट इलेक्ट्रिक बसें 62 रुपए 37 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से चलाने का निर्णय व 362 रूटों पर 3648 प्राइवेट परमिटों के फैसले को रद्द किया जाए। विभाग में 10000 नई बसें शामिल कर 60000 बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक इलेक्ट्रिक बस के बदले साधारण 6 बसें आती हैं, जो पूरे हरियाणा प्रदेश में सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का जो निर्णय है अगर उसकी जगह पर साधारण 300-300 साधारण बसें डिपो के बेड़े में शामिल हों तो हरियाणा प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होंगी। एक बस पर 6 बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। इस प्रकार सरकारी बसों पर 43200 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा और जनता को बेहतर सेवा मिलेगी। अगर इलेक्ट्रिक बस यही सरकार चलाना चाहती है तो सरकार खुद सरकारी बसें खरीद कर रोडवेज के बेड़े में शामिल करे। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि परिवहन मंत्री से बातचीत में जो मांगे मानी गई थीं उनको तुरंत लागू करें।