तोशाम में स्कूल बस के फर्श में मासूम बच्ची फंसने के मामले में दोषियों के खिलाफ पुलिस को सुशील वर्मा ने दी शिकायत

तोशाम में स्कूल बस के फर्श में मासूम बच्ची फंसने के मामले में दोषियों के खिलाफ पुलिस को सुशील वर्मा ने दी शिकायत

तोशाम में स्कूल बस का फर्श टूटने से फंसी मासूम बच्ची, दोषियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज

विष्णु दत्त शास्त्री /तोशाम /29 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

तोशाम में एक निजी स्कूल की चलती बस का फर्श टूटने से करीब 3½ वर्ष की मासूम बच्ची बस के फर्श में फंस गई थी और उसके पैर बस के टायरों के बेहद करीब पहुंच गए थे। बस में मौजूद अन्य बच्चों के शोर मचाने पर चालक ने बस रोकी और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। 

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इस घटना के पश्चात् हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य एवं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के क्रियान्वयन से संबंधित पीआईएल के याचिकाकर्ता सुशील वर्मा ने थाना तोशाम में लिखित शिकायत देकर तत्काल मामला दर्ज करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। 

सिर्फ चालक नहीं, स्कूल प्रबंधन और जिम्मेवार अधिकारियों की भी हो जांच...

सुशील वर्मा ने कहा कि इस मामले को केवल चालक की लापरवाही तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि बस का मालिक कौन है, इसे कौन चला रहा था, किस स्कूल ने बस को बच्चों के परिवहन के लिए लगाया था, बस के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या स्कूल ने बच्चों को बैठाने से पहले वाहन की जांच की थी। चालक और परिचालक की वैधता तथा उनकी तैनाती की भी जांच होनी चाहिए। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी खतरनाक स्थिति वाली बस को फिटनेस प्रमाणपत्र कैसे मिला? पुलिस से बस की मूल फिटनेस फाइल प्राप्त कर यह जांच करने की मांग की गई है कि नवीनतम फिटनेस प्रमाणपत्र किसने जारी किया, वाहन का भौतिक निरीक्षण कब और कहां हुआ, निरीक्षण किस अधिकारी ने किया तथा क्या उस समय बस के फर्श की स्थिति ऐसी ही थी। 

यदि जांच में यह सामने आता है कि गंभीर खराबी के बावजूद वाहन को फिट घोषित किया गया था, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ लापरवाही, कर्तव्य में चूक, गलत प्रमाणन अथवा मिलीभगत, जो भी साक्ष्यों से स्थापित हो, उसके अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। 

सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का गंभीर उल्लंघन...

सुशील वर्मा ने कहा कि यह घटना सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के उद्देश्य और सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने CWP-PIL-116-2019 (O&M) में 23 जनवरी 2023 को सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के क्रियान्वयन में सामने आई अनियमितताओं और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी के मुद्दे पर सुनवाई की थी। 

हाईकोर्ट के समक्ष हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया था कि स्कूल बसों के निरीक्षण के लिए टैक्निकल एक्सपर्ट, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर, पुलिस अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी आदि को शामिल करके चैकिंग टीम गठित की गई है। अधिकारियों द्वारा यह भी बताया गया था कि नियमों और नीति का उल्लंघन करने वाले स्कूल परिवहन वाहनों के खिलाफ चालान किए जा रहे हैं। 

हाईकोर्ट ने यह स्वतंत्रता भी दी थी कि यदि स्कूलों या अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा नीति के क्रियान्वयन में कोई कमी या उल्लंघन जारी रहता है, तो व्यापक शिकायत/प्रतिनिधित्व के आधार पर आगे की कार्यवाही की जा सकती है। 

याचिकाकर्ता सुशील वर्मा

सुशील वर्मा का बयान...

यह बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना है। करीब साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची चलती स्कूल बस के टूटे हुए फर्श में फंस गई और उसके पैर टायरों के बीच पहुंच गए। अगर दूसरे बच्चों ने शोर न मचाया होता और बस समय पर न रुकती तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।

यह सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का गंभीर उल्लंघन है। मैंने थाना तोशाम में लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज करने की मांग की है। इस मामले को केवल चालक की गलती बताकर समाप्त नहीं किया जा सकता। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि ऐसी खतरनाक हालत वाली बस बच्चों को लेकर सड़क पर कैसे चल रही थी और उसे फिटनेस प्रमाणपत्र किस आधार पर दिया गया।

स्कूल प्रबंधन, बस मालिक/ऑपरेटर, चालक और परिचालक के साथ-साथ उन जिम्मेवार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिनका दायित्व स्कूल वाहनों का निरीक्षण, फिटनेस और सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का पालन सुनिश्चित करना है। यदि किसी अधिकारी ने ऐसी कंडम अथवा असुरक्षित बस को फिटनेस प्रमाणपत्र दिया या निरीक्षण के दौरान गंभीर खामियों को नजरअंदाज किया है तो उसके खिलाफ भी आपराधिक और विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।

मैं जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग करता हूं कि इस घटना को केवल एक बस तक सीमित न रखा जाए। पूरे भिवानी जिले में संचालित सभी निजी एवं सरकारी स्कूल वाहनों का तत्काल गहन और भौतिक निरीक्षण कराया जाए। संभव है कि ऐसी अन्य कंडम और असुरक्षित बसें भी बच्चों को ढोने के लिए ऑपरेट हो रही हों। किसी दूसरी दुर्घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता।

प्रत्येक स्कूल वाहन की फिटनेस, फर्श, बॉडी, दरवाजे, खिड़कियां, टायर, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों की गहन जांच होनी चाहिए। जो वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें बच्चों के परिवहन से तत्काल हटाया जाना चाहिए।

मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच, दोषियों की जवाबदेही और पूरे जिले के स्कूल वाहनों का विशेष निरीक्षण तत्काल जरूरी है।

साक्ष्य सुरक्षित करने की मांग...

शिकायत में पुलिस से यह भी मांग की गई है कि बस की मरम्मत या उसमें कोई बदलाव किए जाने से पहले उसकी वर्तमान स्थिति को फोटो और वीडियो के माध्यम से सुरक्षित किया जाए तथा मूल आरसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, पुराने निरीक्षण रिकॉर्ड, एमवीआई/परिवहन विभाग के रिकॉर्ड, स्कूल परिवहन रिकॉर्ड, रखरखाव एवं मरम्मत रिकॉर्ड, चालान/डिफेक्ट हिस्ट्री, चालक-परिचालक रिकॉर्ड, संबंधित निरीक्षण समिति के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा उपलब्ध जीपीएस/इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच में शामिल किए जाएं। बस का स्वतंत्र तकनीकी/मैकेनिकल निरीक्षण भी कराया जाए। 

सुशील वर्मा ने पुलिस से मांग की है कि मामला दर्ज कर स्कूल प्रबंधन, वाहन मालिक/ऑपरेटर, चालक-परिचालक तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए और जिस भी व्यक्ति की लापरवाही, कर्तव्य में चूक, गलत प्रमाणन या अन्य जिम्मेदारी जांच में सामने आए, उसके खिलाफ उचित आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मामला नंबर और कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की है। 

यह शिकायत केवल एक बच्ची के साथ हुई घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में स्कूल जाने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। प्रशासन को दुर्घटना के बाद नहीं, बल्कि दुर्घटना रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।

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