US Sanctions Bill: अमेरिका के रूस-ईरान प्रतिबंध बिल से भारत के लिए ट्रेड डील की बढ़ी जरूरत, बढ़ सकता है इम्पोर्ट बिल

यूएस सीनेट ने 7 अगस्त 2026 को 86-11 के वोटों से "Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026" को भारी बहुमत से पास कर दिया है। रूसी क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस खरीदने वालों को टारगेट करने वाले इस bipartisan कानून के बाद, बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने 8 अगस्त 2026 को कहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत करना भारत के लिए "और अधिक महत्वपूर्ण" हो गया है।
अमेरिका का नया बिल और टैरिफ प्रावधान
यह बिल यूएस प्रेसिडेंट को उन देशों के सामानों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जिन्हें रूसी क्रूड और गैस का बड़ा खरीदार माना जाता है, खासकर वे देश जो रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहे हैं। यह रूस के फाइनेंशियल सेक्टर और एनर्जी रेवेन्यू पर प्रतिबंधों को और बढ़ाता है। हालांकि यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के पास सटीक टैरिफ दरों पर अधिकार है और प्रेसिडेंट नेशनल इंटरेस्ट के लिए प्रतिबंधों को हटा सकते हैं, लेकिन सीनेटर डेब्र फिशर ने स्पष्ट रूप से चीन, भारत और ब्राजील का जिक्र किया है जो रूसी एनर्जी ट्रेड से मुनाफा कमा रहे हैं।
भारत के इम्पोर्ट बिल पर असर और ट्रेड डील की बातचीत
सबनवीस ने चेतावनी दी है कि इन प्रतिबंधों के कारण क्रूड सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट से भारत का इम्पोर्ट बिल काफी बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इस बिल का पास होना ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका एक interim trade agreement की दिशा में एक्टिव रूप से काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त 2026 को की थी। हालांकि, हाल ही में भारतीय सामानों पर लगाया गया Section 301 forced-labor tariff सहित मौजूदा टैरिफ तनाव इन चल रही बातचीत को जटिल बना सकता है, क्योंकि यह बिल अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में विचार के लिए जाएगा, जिसकी उम्मीद congressional summer recess के बाद की जा रही है।