विदिशा मेडिकल कॉलेज में डे-केयर कैंसर सुविधा का उद्घाटन

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विदिशा मेडिकल कॉलेज में डे-केयर कैंसर सुविधा का उद्घाटन किया; कहा कि डीएई-टीएमसी व्यापक कैंसर देखभाल लोगों के निकट ला रहा है
नई दिल्ली / 8 सितंबर2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि देश में बढ़ते कैंसर के मामलों को देखते हुए विभिन्न स्तरों पर कैंसर देखभाल सुविधाओं का निरंतर विस्तार आवश्यक है ताकि रोगी अपने घरों के पास ही गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के माध्यम से, कैंसर उपचार और विकिरण से लेकर रोकथाम, शीघ्र पता लगाने, निदान और चिकित्सा पेशेवरों के प्रशिक्षण तक की सेवाओं के साथ, देश के विभिन्न हिस्सों में कैंसर देखभाल क्षमताओं को पहुंचाने के लिए काम कर रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैंसर के बढ़ते बोझ को बढ़ाने वाली खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए नागरिकों और समाज से सहयोग की अपील की।
डॉ. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर के लिए बने डे-केयर केंद्र के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने के चरणबद्ध प्रयासों के अंतर्गत, परमाणु ऊर्जा विभाग के टाटा मेमोरियल सेंटर के तकनीकी सहयोग से इस केंद्र का विकास किया जा रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि विदिशा पहल को एक व्यापक राष्ट्रीय प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसके तहत टाटा मेमोरियल सेंटर के माध्यम से परमाणु ऊर्जा विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न स्तरों पर कैंसर देखभाल क्षमताओं का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा, "कहीं कैंसर का उपचार हो रहा है, कहीं विकिरण चिकित्सा प्रदान की जा रही है। हम राज्य स्तर के डॉक्टरों को कैंसर प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।" उन्होंने प्रमुख महानगरों से परे विशेष कैंसर देखभाल क्षमताओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विदिशा कार्यक्रम का शुभारंभ टाटा मेमोरियल सेंटर के वरिष्ठ विशेषज्ञों की एक बहुविषयक टीम द्वारा 5 से 7 जून, 2026 तक किए गए कैंसर गैप केयर विश्लेषण के साथ हुआ। इस टीम में शल्य चिकित्सा, चिकित्सा और विकिरण ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और निवारक देखभाल के विशेषज्ञ शामिल थे। इसी अवधि के दौरान, विदिशा में एक व्यापक कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। दो दिवसीय स्क्रीनिंग कार्यक्रम के दौरान 586 कैंसर रोगियों और 254 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई, जिनके लिए उचित आगे के उपचार और रेफरल की व्यवस्था की गई।
उन्होंने कहा कि विदिशा मेडिकल कॉलेज में कैंसर देखभाल सेवाओं के चरणबद्ध विस्तार में डे-केयर सुविधा पहला कदम है। टाटा मेमोरियल सेंटर ने पहले ही उपकरण और दवा खरीद, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियोथेरेपी, पैथोलॉजी, सामुदायिक लोकसंपर्क, कैंसर रजिस्ट्री और प्रशामक देखभाल को कवर करते हुए एक संरचित कार्य योजना प्रस्तुत की है।
मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, विदिशा विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग के दो डॉक्टरों और सात नर्सिंग अधिकारियों ने मुंबई स्थित एसीटीआरईसी में कैंसर विज्ञान का विशेष प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। विदिशा के सर्जनों और शल्य चिकित्सा कर्मचारियों का प्रशिक्षण शीघ्र ही खारघर स्थित एसीटीआरईसी में आरंभ होने वाला है। इसका उद्देश्य संस्थान को स्थानीय स्तर पर सामान्य शल्य चिकित्सा संबंधी कैंसरों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विदिशा कैंसर उपचार योजना में रेडियोथेरेपी एक और महत्वपूर्ण घटक है। मध्य प्रदेश सरकार ने विदिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक रेडियोथेरेपी सुविधा के निर्माण की घोषणा की है, जिसमें लीनियर एक्सीलरेटर (लिनैक) सुविधा अगले दो से तीन वर्षों में चालू होने की उम्मीद है। इससे विदिशा और निकटवर्ती जिलों के रोगियों को घर के पास ही उन्नत विकिरण उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
इस कार्यक्रम में कैंसर निदान और पैथोलॉजी सेवाओं को सुदृढ़ करने का भी प्रावधान है। टाटा मेमोरियल सेंटर ने कैंसर के सटीक निदान और उप-वर्गीकरण के लिए आवश्यक इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (आईएचसी) और आणविक मार्करों की एक व्यापक सूची प्रदान की है। विदिशा के पैथोलॉजी कर्मियों को मुंबई स्थित टीएमसी में ऑन्कोपैथोलॉजी, आईएचसी तकनीकों और आणविक निदान में विशेष प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैंसर का उपचार केवल निदान के बाद उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि रोकथाम और शीघ्र निदान पर भी विशेष जोर देना चाहिए। टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और शीघ्र निदान के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर काम करेगा। स्वास्थ्यकर्मियों को कैंसर के बोझ को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित कार्यनीतियों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसके कार्यान्वयन और आवधिक निगरानी में टीएमसी सहयोग करेगा।
विदिशा कार्यक्रम जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) और अस्पताल-आधारित कैंसर रजिस्ट्री (एचबीसीआर) की स्थापना के माध्यम से स्थानीय कैंसर डेटा को और सुदृढ़ करेगा। ये रजिस्ट्रियां कैंसर की घटनाओं, निदान के चरण और उपचार के परिणामों के बारे में स्थानीय जानकारी प्रदान करेंगी, जिससे भविष्य की योजना और संसाधनों के आवंटन के लिए साक्ष्य-आधारित प्रमाण उपलब्ध होंगे। समर्पित उपशामक देखभाल सेवाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिनके तहत डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को उपशामक चिकित्सा में संरचित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विदिशा पहल को व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में रखते हुए कहा कि कैंसर की चुनौती की भयावहता को देखते हुए, कैंसर देखभाल सुविधा केन्द्र को कुछ चुनिंदा प्रमुख केंद्रों तक सीमित न रखकर विस्तारित करना आवश्यक है। उन्होंने अनुमानों को संदर्भित करते हुए कहा कि 2030 तक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख नए कैंसर के मामले सामने आ सकते हैं, जिससे रोकथाम, शीघ्र पहचान, निदान और उपचार क्षमता का विस्तार करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने टाटा मेमोरियल सेंटर के माध्यम से कैंसर देखभाल के लिए एक व्यापक संस्थागत नेटवर्क पहले ही तैयार कर लिया है। मार्च 2026 में जारी पीआईबी विज्ञप्ति के अनुसार, टीएमसी ने मुंबई, खारघर-नई मुंबई, पंजाब, वाराणसी, विशाखापत्तनम, मुजफ्फरपुर और गुवाहाटी सहित सात राज्यों में 11 अस्पताल/संस्थागत इकाइयां स्थापित की हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस संस्थागत नेटवर्क को राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (एनसीजी) की सहायता प्राप्त है, जो 380 से अधिक कैंसर केंद्रों, अनुसंधान संगठनों, रोगी समूहों और पेशेवर निकायों के एक सहयोगी नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है। ग्रिड गुणवत्ता सुधार, मानकीकरण, मानव संसाधन प्रशिक्षण और कैंसर अनुसंधान में सहयोग प्रदान करता है, जिससे देश भर में कैंसर सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य एक ऐसी प्रणाली तैयार करना है जिसमें स्थापित कैंसर केंद्रों की विशेषज्ञता और अनुभव देश के अन्य हिस्सों में स्थित संस्थानों को क्रमिक रूप से सहयोग प्रदान कर सकें। टीएमसी का वर्तमान नेटवर्क मजबूत क्षेत्रीय संबंधों को विकसित करने के लिए मॉडल प्रदान करता है, जबकि राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड तकनीकी इनपुट, मानकीकरण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और ज्ञान साझाकरण के लिए एक मंच प्रदान करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कठुआ स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज का भी उल्लेख किया, जो उन संस्थानों में से एक है जहां टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से कैंसर देखभाल क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापक दृष्टिकोण यह है कि बड़े महानगरों से बाहर स्थित चिकित्सा संस्थानों को धीरे-धीरे अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमताएं विकसित करने में सक्षम बनाया जाए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीएई-टीएमसी के अंतर्गत कैंसर देखभाल के प्रयास केवल अलग-अलग उपचार सुविधाएं स्थापित करने तक सीमित नहीं हैं। इसमें मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, उन्नत पैथोलॉजी, रोकथाम और शीघ्र पहचान, कैंसर निगरानी, प्रशामक देखभाल और डॉक्टरों एवं नर्सिंग कर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है।
विदिशा पहल इसी एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाती है। डे-केयर सुविधा केन्द्र से शुरू होकर, मेडिकल कॉलेज एक व्यापक कैंसर-देखभाल ढांचे की ओर बढ़ रहा है जो धीरे-धीरे उपचार, निदान, रेडियोथेरेपी, प्रशिक्षित मानव संसाधन, रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, कैंसर रजिस्ट्री और प्रशामक देखभाल को एक समन्वित कार्यक्रम के तहत एकीकृत करेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के बढ़ते कैंसर देखभाल तंत्र के लाभ रोगियों तक उनके निवास स्थान के करीब पहुंचें, जिससे रोगियों और उनके परिवारों को निदान और उपचार के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो जाए।
उन्होंने कहा कि विदिशा सुविधा केन्द्र प्रमुख महानगरीय केंद्रों से परे विशेषीकृत कैंसर देखभाल क्षमताओं को ले जाने और देश भर में अधिक सुलभ, विकेन्द्रीकृत और व्यापक कैंसर देखभाल नेटवर्क के निर्माण की दिशा में एक और कदम है।