पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने लगाया गंभीर आरोप, कहा- गुलज़ार सिंह की आत्महत्या के मामले से ध्यान भटकाने के लिए आप सरकार कर रही सीजेपी का इस्तेमाल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने लगाया गंभीर आरोप, कहा- गुलज़ार सिंह की आत्महत्या के मामले से ध्यान भटकाने के लिए आप सरकार कर रही सीजेपी का इस्तेमाल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा आत्महत्या के लिए मजबूर किए गए गुलज़ार सिंह के मामले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अपने प्रॉक्सी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी का इस्तेमाल किया है। वड़िंग ने कहा कि जब सरकार पर वित्त मंत्री को बर्खास्त करने का भारी दबाव था, तब उसने सीजेपी के कार्यकर्ताओं को पंजाब के स्कूलों का ऑडिट करने के लिए आगे कर दिया ताकि शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति की आड़ में मुख्य मुद्दे को दबाया जा सके।

सीजेपी की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब की चरमराई शिक्षा व्यवस्था की तारीफ करने को लेकर सीजेपी की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी से भी छिपा नहीं है कि सीजेपी पूरी तरह से आम आदमी पार्टी का प्रॉक्सी संगठन है और वह खुले तथा छिपे तौर पर पार्टी के ही राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। वड़िंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार यह बहुत अच्छी तरह जानती थी कि सीजेपी द्वारा उसकी असफल शिक्षा व्यवस्था की तारीफ करने का परिणाम उल्टा ही निकलेगा। इसके बावजूद सरकार ने जानबूझकर ऐसा किया ताकि गुलज़ार सिंह की आत्महत्या का संवेदनशील मामला पूरी तरह से पृष्ठभूमि में चला जाए।

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चीमा के इस्तीफे और जेल जाने तक जारी रहेगा विरोध

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मामले को इतनी आसानी से दबने नहीं देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने देंगे और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को अपने पद से इस्तीफा देना ही होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी यह पूरी तरह से सुनिश्चित करेगी कि आरोपी मंत्री को कानून के तहत जेल भेजा जाए।

राज्य के सरकारी स्कूलों में खाली पड़े हैं हजारों पद

राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बेहद दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए वड़िंग ने आंकड़े पेश किए कि पंजाब में शिक्षकों के कुल स्वीकृत 1,03,052 पदों में से 18,015 पद अभी भी खाली पड़े हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इसके अलावा राज्य के कुल 1,927 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 1,113 स्कूलों में नियमित प्रिंसिपल तक तैनात नहीं हैं। वड़िंग ने आगे बताया कि शिक्षकों और प्रशासनिक अमले की यह भारी कमी केवल साधारण सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के सबसे बड़े प्रचारित कार्यक्रम स्कूल्स ऑफ एमिनेंस में भी साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

स्कूल्स ऑफ एमिनेंस और फर्जी दाखिलों पर तंज

वड़िंग ने आरोप लगाया कि राज्य के स्कूल्स ऑफ एमिनेंस में भी 140 से अधिक स्टाफ के पद पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के बच्चों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के अपने बड़े-बड़े दावों को कैसे पूरा कर पाएगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आम आदमी पार्टी के ये तथाकथित स्कूल्स ऑफ एमिनेंस असल में पहले से ही चल रहे मॉडल स्कूल ही हैं, जिन्हें सरकार ने केवल नया नाम दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान चलाए गए एक वेरिफिकेशन अभियान में लगभग 70,000 फर्जी छात्र प्रविष्टियों का बड़ा खुलासा हुआ था। वड़िंग का आरोप है कि इन तमाम फर्जी दाखिलों का इस्तेमाल मिड-डे मील और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए आने वाले सरकारी धन की बड़ी हेराफेरी करने के लिए किया जा रहा था।

सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्रों की संख्या

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार आ रही भारी गिरावट पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की कुल संख्या में करीब 1.54 लाख की बड़ी कमी दर्ज की गई है। इसके उलट, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 82,000 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वड़िंग ने कहा कि यह साफ तौर पर दर्शाता है कि आम जनता और अभिभावकों का अब सरकारी स्कूलों से तेजी से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने के जितने भी दावे कर रही है, वे सभी पूरी तरह से झूठे और बेबुनियाद साबित हो रहे हैं। उन्होंने अंत में कहा कि आज भी कई सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब है जहां बुनियादी ढांचे, जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी के कारण छात्रों का पठन-पाठन का माहौल बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

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