हरियाणा में लागू होगा वाटर सिक्योर हरियाणा कार्यक्रम, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने दी जानकारी

चंडीगढ़ में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम को लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही टिकाऊ कृषि पद्धतियों को और अधिक बढ़ावा देना है। राणा शुक्रवार को कृषि विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य और योजना
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम अथवा योजना का मुख्य उद्देश्य सब-सरफेस और वर्टिकल ड्रेनेज तकनीकों के माध्यम से सेम प्रभावित भूमि को उपजाऊ बनाना है। इसके अलावा जल-दक्ष फसलों और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाना भी इसका हिस्सा है। अधिक पानी की खपत वाली फसलों का क्षेत्रफल कम करके किसानों की आय में वृद्धि करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।
क्लस्टर-आधारित रणनीति और लक्ष्य
उन्होंने जानकारी दी कि इस कार्यक्रम को क्लस्टर-आधारित रणनीति के तहत लागू किया जाएगा। जलभराव और लवणता सुधार के लिए झज्जर और रोहतक सहित अन्य प्रभावित जिलों के क्लस्टर-13 में 2.0 लाख एकड़ भूमि को लक्षित किया गया है। इसमें चरणबद्ध तरीके से ड्रेनेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। फसल विविधीकरण और पानी की बचत के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल के क्लस्टर-5 में 5.0 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं दूसरी ओर, क्लस्टर-13 में 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में 'मेरा पानी मेरी विरासत' के तहत वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यान्वयन अवधि और वित्तीय बजट
राणा ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम को वर्ष 2026 से 2032 तक कुल छह वर्षों की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव है। इसकी कुल अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये तय की गई है। इस परियोजना के लिए 70 प्रतिशत राशि यानी 4,000.36 करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी। जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि यानी 1,714.44 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार अपने अंशदान के रूप में वहन करेगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा इस परियोजना के कृषि घटक के लिए 886.00 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो कुल परियोजना लागत का लगभग 16 प्रतिशत है।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस अवसर पर कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक इस बैठक में उपस्थित थे। इसके अलावा अतिरिक्त निदेशक रामप्रताप सिहाग एवं डॉ. देवेंद्र सिहाग भी मौजूद रहे। इन अधिकारियों के अलावा विभाग के अन्य अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित थे।