जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, जिंदादिली से जीने की सीखें कला

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, जिंदादिली से जीने की सीखें कला

जीवन अनमोल है और इसे खत्म करने का अधिकार हमें स्वयं भी नहीं है क्योंकि यह जीवन अन्य की देन है। आत्महत्या कभी भी किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। आत्महत्या कमजोरी पर कायरता की निशानी है और हमें हर हाल में संघर्ष करके जिंदादिली से जीना है। इसी गंभीर मुद्दे पर जागरूकता निर्माण करने के लिए हर साल 10 सितंबर को “विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस” मनाया जाता है।

जीवन का अनमोल मोल

जीवन के मोल का अंदाजा केवल एक बात से लगाया जा सकता है कि एक मृत शरीर है और दुनिया की सारी दौलत खर्च करके, अत्याधुनिक अस्पताल, सरकारें, धार्मिक कर्मकांड सब मिलकर कोशिश कर लें, पूरे ब्रह्मांड की ताकत लगाकर भी मृत शरीर में एक सेकंड के लिए भी जान नहीं ला सकते हैं। इसका उद्देश्य लोगों में आत्महत्या जैसे बुरे विचारों को दूर करना है और एक सुखद सकारात्मक सोच जैसा वातावरण बनाने पर जोर देना है। वर्ष 2024 से 2026 तक इसकी थीम "आत्महत्या के बारे में सोच बदलना और बातचीत शुरू करें" यह रखी गयी है।

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आत्महत्या के प्रमुख कारण

आज के आधुनिक युग में आत्महत्याओं में बेहद बढ़ोतरी हमें यह संकेत दे रही है कि हम अनुचित वातावरण में जी रहे हैं। आत्महत्या के कारणों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक खेलों का शिकार होना, अकेलापन और कमजोर होते सामाजिक संबंध, असफलता, पढ़ाई और करियर का दबाव शामिल हैं। इसके अलावा आर्थिक असुरक्षितता, धोखाधड़ी, डर, रिश्तों का टूटना, सामाजिक तुलना और डिजिटल दबाव, हिंसा, दुर्व्यवहार और भेदभाव, नशीले पदार्थों का सेवन या बुरी लत, झूठे दिखावे की आदत, शरीर या मन में लंबे समय तक दर्द और बीमारी जैसे कारण भी जिम्मेदार हैं।

सामाजिक प्रभाव और आंकड़े

जब आत्महत्या होती है, तब केवल एक जान ही नहीं जाती है, बल्कि उस परिवार, रिश्तेदार, कार्यस्थल, समाज और उससे संबंधित संपूर्ण समुदाय में हमेशा के लिए एक स्थान रिक्त हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानसिक स्वास्थ्य एटलस 2024 रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में 7,27,000 मौतें आत्महत्या के कारण हुईं। युवाओं में मौत की तीसरी सबसे बड़ी वजह आत्महत्या ही है। महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में साल 2023 में कुल 6,669 किसान और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की, जबकि पुरे भारत में 10,786 किसानों ने आत्महत्या की थी।

खुद की गलतियों पर नियंत्रण

अनेक बार छोटी-छोटी बिना काम की बातों को अधिक तूल दिया जाता है, जिसका सीधा बुरा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। खुद को दुःख देने के लिए हम खुद ही ज्यादा जिम्मेदार हैं, जैसे जल्द गुस्सा आना, मनमाफिक काम न होने पर आपा खो देना, दुसरो को दोष देना या द्वेष करना, दूसरों पर अंधा भरोसा करना। इन बातों पर नियंत्रण रखकर बेहतर जीवन जिया जा सकता है।

बचाव और सकारात्मक जीवनशैली

दूसरों पर जल्द भरोसा न करें और अंधा भरोसा किसी पर भी न करें। समयानुसार अपने काम में परिवर्तनशीलता लाएं और कौशलता सीखें। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की तंदरुस्ती के लिए रोजाना व्यायाम करें। प्रकृति, पर्यावरण, पशु-पक्षी की रक्षा और परोपकार की भावना जगाएं तथा असहायों की मदद करें।

प्रेरणादायक उदाहरण और संघर्ष

लुई ब्रेल, अब्राहम लिंकन, महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, डॉ. बी. आर. अंबेडकर, मदर टेरेसा, ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, दशरथ मांझी, बछेंद्री पाल जैसी असंख्य हस्तियों ने विपरीत परिस्थितियों पर मात कर संघर्षमय जीवन को एक मिसाल बनाया है। साधारण कद-काठी और अनपढ़ गरीब मजदूर दशरथ मांझी ने 22 साल के अथक परिश्रम से अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाया। जब तक सफलता नहीं मिलती तब तक प्रयास जारी रखें क्योंकि जीत उसी की होती है जिसका हौसला बुलंद होता है।

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