कांग्रेस की वजह से नायब सरकार के कई फैसले अधर में लटके, कई फैसले अधर में लटके

www.atalhind.com3 April 20253 min read1 viewsचंडीगढ़
कांग्रेस की वजह से नायब सरकार के कई फैसले अधर में लटके, कई फैसले अधर में लटके

चंडीगढ़: कांग्रेस हाईकमान की वजह से हरियाणा की नायब सरकार के कई फैसले अधर में लटके पड़े हैं। कांग्रेस द्वारा विधायक दल (सीएलपी) के नेता का फैसला अभी तक नहीं किया गया है। प्रदेश में कई संवैधानिक पदों पर फैसलों एवं नियुक्तियों में नेता प्रतिपक्ष का होना अनिवार्य है। नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की वजह से नायब सरकार चयन समितियां भी नहीं बना पा रही। इस वजह से कई यूनिवर्सिटी में वाइस चालंसर की नियुक्ति और सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों सहित कई फैसलों पर असर पड़ा है।

दरअसल, संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति का गठन किया जाता है। इससे पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सर्च कमेटी बनती है। वर्तमान में सर्च कमेटी तो बनी हुई है लेकिन चयन समिति का गठन नहीं हो पाया है। चयन समिति में मुख्यमंत्री के अलावा एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता को सदस्य बनाया जाता है। नब्बे सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से विपक्ष का नेता कांग्रेस से बनना है।

भाजपा के 48 विधायक हैं। वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। पिछले साल 8 अक्तूबर को विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए थे। इसके बाद से लेकर अभी तक भी कांग्रेस द्वारा विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं किया गया है। कांग्रेस विधायक दल के नेताको ही विधानसभा स्पीकर द्वारा नेता प्रतिपक्ष घोषित किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का रैंक और सुविधाएं मिलती हैं। 2019 से 2024 तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा नेता प्रतिपक्ष थे।

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हरियाणा राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित सूचना आयुक्तों के 11 पद हैं। इनमें से आठ पद खाली हैं। पिछले दिनों ही मुख्य सूचना आयुक्त विजय वर्द्धन और सूचना आयुक्त डॉ़ एसएस फूलिया का कार्यकाल भी पूरा हो गया। वर्तमान में आयोग में महज तीन सूचना आयुक्त – प्रदीप कुमार शेखावत, डॉ़ कुलबीर छिक्कारा व डॉ़ जगबीर सिंह ही कार्यरत हैं। इनका भी कार्यकाल पूरा होने वाला है। नायब सरकार द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त व सात सूचना आयुक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

इसके लिए आवेदन मांगे जा चुके हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी आवेदनों की छंटनी करने के बाद इन पदों के लिए तीन-तीन के नाम के पैनल तैयार करेगी। ये पैनल चयन समिति के पास जाएंगे और फिर चयन समिति मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्तों का चयन करेगी। नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की वजह से सूचना आयोग का काम प्रभावित हो रहा है। आयोग में 11 हजार के करीब शिकायतें लंबित हैं।र

वीसी की नियुक्ति भी लटकी
विश्वविद्यालयों में कुलपति के अलावा हरियाणा लोकसेवा आयोग के चेयरमैन व सदस्यों व सेवा का अधिकार आयोग सहित कई संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में नेता प्रतिपक्ष की जरूरत रहती है। हरियाणा सरकार पांच यूनिवर्सिटी में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए भी आवेदन मांग चुकी है। माना जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष का अगर जल्द फैसला नहीं होता तो कुलपतियों की नियुक्ति में भी देरी हो सकती है।

वैकल्पविक व्यवस्था पर विचार
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष में हो रही देरी की वजह से सरकार नियुक्तियों में अब और देरी करने के मूड़ में नहीं है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) के अधिकारी इसका दूसरा रास्ता निकालने पर मंथन कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की स्थिति में प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस से किसी वरिष्ठ विधायक को प्रतिनिधि के तौर पर चयन समिति में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद सरकार चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।

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