विधायक मंत्री न बनने पर दुखी हैं, मंत्री सीएम न बनने पर, सीएम दुखी कि पता नहीं कब तक रहेंगे: गडकरी

12 September 20213 min read0 viewsराजनीति
विधायक मंत्री न बनने पर दुखी हैं, मंत्री सीएम न बनने पर, सीएम दुखी कि पता नहीं कब तक रहेंगे: गडकरी

विधायक मंत्री न बनने पर दुखी हैं, मंत्री सीएम न बनने पर, सीएम दुखी कि पता नहीं कब तक रहेंगे: गडकरी

जयपुर: कई भाजपा शासित राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि समस्या सबके साथ है. हर कोई दुखी है.

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जनसत्ता के अनुसार, गडकरी सोमवार को राजस्थान विधानसभा में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की राजस्थान इकाई द्वारा ‘संसदीय प्रणाली और जन अपेक्षाएं’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र में बोल रहे थे.

केंद्रीय मंत्री ने हल्के अंदाज में कहा, ‘जो विधायक हैं वो दुखी हैं कि मंत्री नहीं बन पाए, जो मंत्री है वो दुखी हैं कि मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और जो मुख्यमंत्री हैं वो इसलिए दुखी हैं कि कब रहेंगे, कब जाएंगे इसका भरोसा नहीं.’

 

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रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठित व्यंग्यकार शरद जोशी को उद्धृत करते हुए गडकरी ने कहा, ‘शरद जोशी ने लिखा था कि जो राज्यों में काम के नहीं थे, उन्हें दिल्ली भेज दिया. जो दिल्ली में काम के न थे, उन्हें राज्यपाल बना दिया और जो वहां भी काम के नहीं थे, उन्हें राजदूत बना दिया.’

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा अध्यक्ष रहते हुए उन्हें कोई भी ऐसा नहीं मिला जो दुखी न हो. उन्होंने कहा, ‘एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि आप आनंदित कैसे रहते हो, मैंने कहा कि मैं भविष्य की चिंता नहीं करता, जो भविष्य की चिंता नहीं करता, वह खुश रहता है. वनडे क्रिकेट की तरह खेलते रहो. मैंने सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर से चौके-छक्के लगाने का राज पूछा तो वे बोले, यह स्किल है. इसी तरह राजनीति भी एक स्किल है.’

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राजनीति को सामाजिक व राजनीतिक बदलाव का प्रभावी उपकरण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र का मकसद समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाना है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘राजनीति सामाजिक व राजनीतिक बदलाव का प्रभावी उपकरण है. इसलिए लोकतंत्र के माध्यम से समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को टिकाऊ बनाना, सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन लाना तथा उसी से समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करना ही लोकतंत्र का मकसद है.’

उन्होंने कहा कि राजनीति का अर्थ क्या है इन बातों पर हम सभी को पुनर्विचार करना होगा और लोकतंत्र की भावना को समझना होगा. उन्होंने कहा, ‘समाज सेवा राजनीति का एक हिस्सा है, लेकिन आजकल सौभाग्य या दुर्भाग्य से हम राजनीति का अर्थ केवल सत्ताकरण समझते हैं.’

अपने संबोधन में जल नियोजन पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को बदलने में सबसे बड़ी समस्या पानी है.

उन्होंने कहा कि जब तक हमारा सिंचित क्षेत्र 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं होता है तब तक यह देश आत्मनिर्भर नहीं बन पाएगा, गांव समृद्ध संपन्न नहीं बन पाएंगे. जब तक किसान को पानी नहीं मिलेगा तब तक देश की तस्वीर नहीं बदलेगी.

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने गडकरी का स्वागत किया. संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संबोधित किया था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजनीति का अर्थ क्या है इस पर हम सभी को पुनर्विचार करना होगा और लोकतंत्र की भावना को समझना होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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