किसिंग कार और मानवीय भावनाओं की कदर!

किसिंग कार और मानवीय भावनाओं की कदर!
“भीगे होंठ तेरे, प्यासा मन मेरा...” गाना अचानक याद आ गया। फर्क बस इतना है कि फिल्मों में गाने के बाद हीरो-हीरोइन के होंठों की कहानी खत्म हो जाती है, लेकिन ग्वालियर में एक साहब ने इस रोमांस को कार तक पहुंचा दिया। वह भी कोई छोटा-मोटा रोमांस नहीं,पूरी कार पर करीब 3,400 लिपस्टिक किस! प्रेम का ऐसा खुला प्रदर्शन कि कार बेचारी खुद सोच रही होगी, “भाई, मुझे गाड़ी ही रहने दो, प्रेमिका मत बनाओ!” ऊपर से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल हुआ, करीब 55 लाख लोगों ने देखा और आखिरकार ट्रैफिक पुलिस की नजर भी पड़ गई। पुलिस ने कार जब्त की, 5,500 रुपये का चालान काटा और थाने में खड़ी करवाकर उस पर लगे सारे किस साफ करवा दिए। यानी जिस कार को प्रेम की चलती-फिरती निशानी बनाने की कोशिश की गई थी, पुलिस ने उसे फिर से साधारण गाड़ी बना दिया।
अब सवाल है कि कार पर इतने किस करने की जरूरत आखिर थी ही क्यों? देश में इतने सारे कुंवारे घूम रहे हैं, इतने लोग प्यार की तलाश में हैं, इतने बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड एक-दूसरे के मैसेज का जवाब आने का इंतजार करते हुए मोबाइल घूर रहे हैं और यहां एक कार पर 3,400 किस बरसा दिए गए! यह तो ऐसा है जैसे किसी भूखे के सामने खाना परोसने के बजाय उसे कूड़ेदान में डाल दिया जाए। अरे भाई, मानवीय भावनाओं की भी कुछ कदर कर लेते! 3,400 किस कोई छोटी-मोटी संख्या नहीं है। इतने किस अगर किसी बॉयफ्रेंड के गाल पर किए होते तो प्रेम की दुनिया में तहलका मच जाता। शायद गिनीज बुक वाले भी दौड़े चले आते, “इतने लंबे समय तक प्यार सहने वाला पहला बॉयफ्रेंड!” हालांकि इनाम लेने से पहले बेचारे को गाल का इलाज जरूर करवाना पड़ता। 3,400 किस के बाद उसका चेहरा प्यार से ज्यादा ऐसा दिखता, जैसे किसी ने उस पर लगातार चप्पलों की बारिश कर दी हो।
लेकिन आजकल प्यार भी सीधे दिल से नहीं, कैमरे से शुरू होता है। पहले लोग प्यार करते थे, फिर यादें बनाते थे। अब पहले Reel बनती है, फिर प्यार ढूंढा जाता है। पहले प्रेमिका पूछती थी,“तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?” अब सवाल होता है,“मेरे लिए कितने व्यूज ला सकते हो?” प्यार का पैमाना बदल गया है। फूल देने की जगह फिल्टर लगाए जा रहे हैं, चिट्ठी लिखने की जगह कैप्शन लिखा जा रहा है और प्यार का सबूत दिल नहीं, लाइक्स बन गए हैं।
यहां तो मामला और भी आगे निकल गया। कार को लिपस्टिक से चूम-चूम कर ऐसा बना दिया गया, जैसे वह कोई चलती-फिरती प्रेमिका हो। पता नहीं कार मालिक को कार से इतना प्यार था या सोशल मीडिया से। अगर कार से प्यार था तो पेट्रोल भरवाइए, समय पर सर्विस कराइए, टायरों में हवा रखिए, सीट पर कवर लगाइए,यह ज्यादा काम का और टिकाऊ प्यार होता। कार को 3,400 बार चूमने से इंजन की उम्र नहीं बढ़ती, माइलेज नहीं बढ़ता और ट्रैफिक पुलिस से बचने का चांस तो बिल्कुल नहीं बढ़ता।
सबसे मजेदार बात यह है कि इस महान प्रेम-अभियान में करीब साढ़े तीन घंटे लगे और लिपस्टिक पर 800-900 रुपये खर्च हुए। यानी करीब तीन घंटे की मेहनत, सैकड़ों रुपये की लिपस्टिक और आखिर में 5,500 रुपये का चालान! हिसाब लगाइए, प्यार का यह प्रोजेक्ट आर्थिक तौर पर भी घाटे का सौदा निकला। ऊपर से थाने में खड़े होकर अपनी ही मेहनत से लगाए किस साफ करने पड़े। प्यार की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जिस चीज को बनाने में साढ़े तीन घंटे लगे, उसे मिटाने में भी पुलिस की निगरानी में मेहनत करनी पड़ी।
पुलिस की कार्रवाई पर कुछ लोग कह सकते हैं कि आखिर किस करना कौन-सा अपराध है? बिल्कुल, प्यार अपराध नहीं है। लेकिन सड़क प्यार जताने का मंच भी नहीं है। अगर वीडियो में तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाना दिख रहा है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है। गाड़ी को बाहर से इस तरह ढक देना कि उसकी पहचान या सड़क पर सुरक्षित चलना प्रभावित हो, यह अलग मामला है। सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड की प्रसिद्धि के लिए सड़क सुरक्षा को दांव पर लगाना समझदारी नहीं, सीधी मूर्खता है। रील खत्म होने के बाद सड़क वहीं रहती है, लेकिन हादसा हो जाए तो जिंदगी की रील हमेशा के लिए रुक सकती है।
इस घटना से सबसे बड़ा सबक यही मिलता है कि वायरल होने की भूख इंसान से क्या-क्या नहीं करवा रही। आज लोग वह नहीं करते जिससे समाज उन्हें याद रखे; वे वह करते हैं जिसे देखकर लोग मोबाइल पर अंगूठा चला दें। कल तक लोग कहते थे,“कुछ ऐसा करो कि दुनिया याद रखे।” अब कहावत बदल गई है,“कुछ ऐसा करो कि रील वायरल हो जाए।” फर्क बस इतना है कि पहली सोच में उपलब्धि थी, दूसरी में सिर्फ व्यूज हैं।