
बच्चों में मोबाइल की लत बनी जानलेवा, जानिए कैसे स्मार्टफोन और गेमिंग छीन रहे हैं मासूमों की जिंदगी
बच्चों में मोबाइल की लत और ऑनलाइन गेमिंग के कारण आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। माता-पिता की छोटी सी रोक-टोक पर बच्चे जान दे रहे हैं।
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प्रोफ़ेसर सुमित सरकार (1939-2026) बेबाक इतिहासकार थे जिन्होंने बने-बनाये आख्यानों को नकारा। स्वदेशी आंदोलन, मॉडर्न इंडिया और नीचे से इतिहास पर उनका योगदान जानें।

किराए का बॉयफ्रेंड : रिश्तों का ‘ईएमआई प्लान! एक समय था जब लोग कहते थे,”रिश्ते ऊपर वाला बनाता है।” अब लगता है ऊपर वाला सिर्फ इंटरनेट देता है, बाकी रिश्ते ऐप और वेबसाइटें बना देती हैं। पहले किराए पर मकान मिलता था, फिर कार, फिर फर्नीचर, फिर पालतू जानवर, और अब तो जनाब…

जब मौत बन जाए सोशल मीडिया का कंटेंट सोशल मीडिया पर हिंसक वीडियो का प्रसार: संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रश्न हाल के दिनों में एक मासूम बच्चे की निर्मम हत्या और हांसी में एक दुकानदार की दर्दनाक हत्या से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्

जब ट्रेंड तय करने लगे जनमत लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनमत होता है। यह जनमत किसी एक दिन या एक चुनाव के दौरान निर्मित नहीं होता, बल्कि समाज में निरंतर चलने वाले संवाद, बहस, विचार-विमर्श, सामाजिक अनुभवों, राजनीतिक चेतना और नागरिक भागीदारी की लंबी प्रक्रिया से आकार लेता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ना

21 मई – अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस एक प्याली में बसती दुनिया: चाय, संस्कृति और संवाद का वैश्विक उत्सव सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, दोस्ती की मुलाकात हो या विचारों की गंभीर बहस हर क्षण को जोड़ने वाली एक साधारण-सी चीज़ है चाय। अंतरराष्ट्र

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में सेल्फी का दुरुपयोग भी संभव आधुनिक युग में विभिन्न सामाजिक मंचों पर अपने जीवन के विशेष क्षणों को साझा करना मानवीय व्यवहार का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। जब कोई व्यक्ति किसी मनोरम स्था

कभी-कभी संकट ही सबसे बड़ा शिक्षक होता है — फैमिली पूलिंग का उदय संकट में समाधान नहीं, संस्कृति का निर्माण — फैमिली पूलिंग महंगाई ने सिखाया साथ चलना — अब ‘कारपूलिंग’ नहीं, ‘फैमिली पूलिंग’ का दौर हर्मुज जलडमरूमध्य में भड़कती भू-राजनीतिक आग जब पूरी दुनिया की ऊर

अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस 2026: बदलती दुनिया में परिवार क्यों है सबसे बड़ा सहारा हर वर्ष 15 मई को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि उस मूल भावना को याद करने का समय है जिसके सहारे मानव सभ्यता सदियों से आगे बढ़ती रही है—“परिवार”। आधुनिक

माँ: हमारी पहली शिक्षक गीता गर्ग जी एक स्कूल शिक्षिका के रूप में अनेक विद्यार्थियों के भविष्य को संवार रही हैं, जबकि घर में वह अपनी बेटियों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा का स्रोत हैं। Mother’s Day के इस विशेष अवसर पर हम अपनी प्यारी माँ गीता गर्ग जी को हृदय से नमन करते हैं,

स्त्री को देह से आगे देखने की जरूरत: एक सशक्त समाज की नींव डॉ. प्रियंका सौरभ समाज की असली प्रगति इमारतों, सड़कों या जीडीपी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपनी बेटियों, बहनों, माताओं और पत्नियों को किस नजर से देखता है। अगर हम स्त्री को सिर्फ उसके

लेखक- डॉ अशोक कुमार वर्मा चार दीवारों और ईंटों से बना हर भवन “घर” नहीं होता।घर वह होता है, जो परिवार के प्रेम, अपनत्व और आपसी सामंजस्य से सजीव बनता है। अन्यथा वह केवल एक “मकान” रह जाता है। सामान्य भाषा में कहें तो मकान और घर के बीच मुख्य अंतर भौतिक

डाॅ फ़ौज़िया नसीम ‘शाद’-विनायक फीचर्स सौन्दर्य-वृद्धि में फेस पैक (Face packs)का अपना एक अलग और महत्वपूर्ण स्थान है। फेस पैक त्वचा को पर्याप्त पोषण और आकर्षक निखार प्रदान करने के साथ-साथ दाग-धब्बों एवं त्वचा से संबंधित अनेक समस्याओं के समाधान में भी सहायक होता है। बाज़ार में उपलब्ध तैयार फेस

– लेखक- कल्पना पांडे कपड़े बेचने वाली ‘अमेरिकन ईगल’ नामक आर्थिक घाटे में चल रही कंपनी ने 23 जुलाई 2025 को गोरी त्वचा, सुनहरे बाल और नीली आँखों वाली अभिनेत्री सिडनी स्वीनी को बतौर मॉडेल लेते हुए एक विज्ञापन जारी किया। इस विज्ञापन में ‘सिडनी स्वीनी हैज ग्रेट

==लघुकथा== दीक्षांत-समारोह सम्पन्न हो चुका था। डॉक्टरेट की डिग्री हाथों में संभाले निशा पंडाल से उठकर कैंटीन के कोने में पड़ी खाली कुर्सी पर आ बैठी। ख्यालों में गुमसुम सी वह कुछ सोच रही थी। सर्विस- ब्वॉय ने टेबल पर पानी का गिलास रख, उसकी तंद्रा तोड़ते हुए पूछा, “मैडम! क्या लाऊं आपके लिए?” “बस

हैदराबाद की रातों में गूंजा सवाल: क्या है मिस वर्ल्ड का असली उद्देश्य? हैदराबाद की चमकती रातें, जहां सितारों की तरह जगमगाती प्रतिभाएं मिस वर्ल्ड 2025 के मंच पर अपनी छटा बिखेर रही हैं, इस साल एक अनोखे तूफान का गवाह बन रही हैं। यह आयोजन, जो सौंदर्य, बुद्धिमत्ता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, केवल ताज

बदन की बाज़ीगरी या सशक्तिकरण का भ्रम? “सोशल मीडिया पर देह की नुमाइश: सशक्तिकरण या आत्मसम्मान का संकट?” “लाइक्स की दौड़ में खोती पहचान: नारी सशक्तिकरण का असली मतलब” सोशल मीडिया पर नारी देह का बढ़ता प्रदर्शन क्या वाकई सशक्तिकरण है या महज़ लाइक्स और फॉलोअर्स की होड़? क्या हम सच्ची आज़ादी की ओर बढ़

गर्मियों का मौसम आते ही जहां एक ओर लोग ठंडी चीजें और आराम की तलाश में रहते हैं, वहीं दूसरी ओर फिटनेस फ्रीक लोग अपनी हेल्थ को लेकर और भी अलर्ट हो जाते हैं. कुछ लोग वजन कम करने के लिए तो कुछ एक्टिव और एनर्जेटिक रहने के लिए रोजाना एक्सरसाइज या वर्कआउट करते हैं.

हर महिला चाहती है कि उनसे बाल काले, घने और हेल्दी हों, लेकिन आजकल बिगड़ते लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान-पान, प्रदूषण और धूल-मिट्टी का असर भी बालों पर दिखाई देता है. इसके कारण कई लोगों को बाल झड़ने और फ्रिजी होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. अपने बालों को हेल्दी और सॉफ्ट बनाने के लिए

गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी, थकान, डिहाइड्रेशन और सुस्ती जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम में ज्यादा एनर्जी बनाए रखना एक चुनौती बन जाता है. ऐसे में पानी से भरपूर और हाइड्रेटिंग फूड्स का सेवन बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि शरीर को नमी मिले

आज के डिजिटल वर्ल्ड में, मोबाइल फोन एक ऐसी चीज बन गया है, जिसके बिना हम अपनी जिंदगी की सोच भी नहीं कर सकते है. हम न केवल बात करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, शॉपिंग, बैंकिंग, गेमिंग, और भी कई कामों के लिए मोबाइल हमारी डेली लाइफ का
चाय की टपरी पर झूठे कप-प्लेट धोने वाला योगेंद्र सैनी आज भारत का बड़ा यू-टयूबर(टेक्नीकल योगी) है योगेंद्र सैनी ने देश-विदेश में बनाई पहचान दिल्ली (अटल हिन्द ब्यूरो ) भारत में सबसे बड़ा यूटूबर कौन है अगर हम इस पर लिखे तो यह जानकारी बहुत बड़ी हो जाएगी एक कहावत के बड़ा वह नहीं होता जो सिर्फ अपने

कौन से पूर्व लक्षण या संकेत होते हैं जिनसे पता चलता है कि किस्मत चमकने वाली है? 👌कुछ अच्छा अवश्य होने वाला है 😘 अच्‍छा और बुरा, धन-दौलत, नाम-शोहरत सब कुछ भगवान के हाथ में होता है, लेकिन फिर भी हर इंसान चाहता है कि उसके भी अच्‍छे दिन आएं और उसकी भी किस्‍मत चमके।
भारत मूलतः परंपरावादी वैदिक तथा सनातनी देश है पर आधुनिकता ने देश के संयुक्त परिवारों को खंडित कर दिया है। अधिकांश परिवार अब एकल परिवार में परिवर्तित हो गए हैं ऐसे में बुजुर्ग तथा बच्चे सबसे ज्यादा इस त्रासदी के शिकार हुए हैं। आधुनिक जीवन शैली ने माता पिता को नन्हे बच्चों से दूर कर